पटना, 05 अगस्त (पटना डेस्क) बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। संसद परिसर में राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना के विरोध में साधु-संतों का वेश धारण कर किए गए उनके प्रदर्शन को लेकर अब प्रयागराज की अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) योगेश जैन की अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सांसद को 11 अगस्त को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह मामला भाजपा नेता एवं अधिवक्ता सुशील कुमार मिश्रा की ओर से दायर परिवाद के आधार पर दर्ज हुआ है। अदालत के आदेश के बाद पप्पू यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 338, 196, 298, 299 और 356 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

हालांकि इस पूरे मामले पर सांसद पप्पू यादव की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि संसद परिसर में साधु-संतों का वेश धारण कर किया गया प्रदर्शन सनातन धर्म, साधु-संतों और हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला था। उनका कहना है कि अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना को आधार बनाकर सांसद ने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया और धार्मिक प्रतीकों का अनुचित इस्तेमाल किया। भाजपा नेता सुशील कुमार मिश्रा ने अदालत में दायर शिकायत में आरोप लगाया कि भगवान श्रीराम के मंदिर से चढ़ावे की चोरी के आरोपित पहले से जेल में बंद हैं, लेकिन पप्पू यादव ने इस प्रकरण को राजनीतिक रंग देते हुए संसद के बाहर साधु का भेष धारण कर हिंदू समाज की मर्यादा और आस्था को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सांसद ने जानबूझकर फर्जी पुजारी का रूप धारण कर धार्मिक भावनाओं के साथ छल किया, जो गंभीर दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।गौरतलब है कि संसद परिसर में किए गए इस प्रदर्शन के बाद देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। कई साधु-संत संगठनों ने इसका विरोध किया था। वाराणसी में भी उनके खिलाफ मामला दर्ज हुआ था और विरोध के दौरान उन पर हमले की घटनाएं भी सामने आई थीं। अब प्रयागराज में दर्ज मुकदमे के बाद यह विवाद और गहरा गया है तथा राजनीतिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है।

















