:
पटना, 01 अगस्त (पटना डेस्क) बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख एवं राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच सियासी तापमान बढ़ गया है। इसी बीच भाजपा विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेश कुमार के इस्तीफे ने नए राजनीतिक कयासों को जन्म दे दिया है। विपक्ष से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा है कि कहीं यह सीट दीपक प्रकाश के लिए तो खाली नहीं कराई गई। दरभंगा पहुंचे दीपक प्रकाश ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर कोई टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अदालत के समक्ष सभी तथ्यों को रखा जाएगा और वहीं उचित जवाब दिया जाएगा।

दीपक प्रकाश ने भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे को अपनी संभावित उम्मीदवारी से जोड़ने की अटकलों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि कोर्ट का मामला, एमएलसी का इस्तीफा और सीट उनके लिए खाली कराए जाने की चर्चाओं को आपस में जोड़ना पूरी तरह गलत है। इन तीनों के बीच कोई आधिकारिक या तार्किक संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देवेश कुमार ने किन कारणों से इस्तीफा दिया, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। गौरतलब है कि भाजपा एमएलसी देवेश कुमार ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2021 में विधान परिषद पहुंचे देवेश कुमार का कार्यकाल अभी लगभग एक वर्ष शेष था, लेकिन उनके अचानक इस्तीफे के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इधर, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल किया है कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत किसी गैर-विधायक को छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बनाए रखा जा सकता है।

अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब भी तलब किया है।उल्लेखनीय है कि दीपक प्रकाश पहली बार नवंबर 2025 में नीतीश कुमार सरकार में पंचायती राज मंत्री बने थे। उस समय भी वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे। बाद में सरकार बदलने के बावजूद मई 2026 में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार में उन्हें दोबारा मंत्री बनाया गया। हालांकि अब तक वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बन सके हैं, जिससे उनकी संवैधानिक पात्रता को लेकर विवाद और गहरा गया है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और बिहार सरकार के जवाब पर टिकी हैं।













