पटना, 31 जुलाई (पटना डेस्क) बिहार बंद और छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों के बीच किशनगंज के बहादुरगंज निवासी मोहम्मद सदाकत का एक वीडियो सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। सदाकत ने दावा किया है कि वह पिछले चार महीने से रूस में रह रहा है, इसके बावजूद बिहार पुलिस ने हाल ही में छात्र आंदोलन और बिहार बंद से जुड़े मामले में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी। युवक के इस दावे ने पुलिस की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में सदाकत ने कहा कि आंदोलन के दौरान वह भारत में मौजूद ही नहीं था, इसलिए उसे आरोपी बनाया जाना पूरी तरह गलत है। उसने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने, अपने विदेश में रहने के दस्तावेजों की जांच करने और प्राथमिकी से उसका नाम तत्काल हटाने की मांग की है।

हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले पर किशनगंज के पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को एफआईआर या पुलिस कार्रवाई को लेकर कोई शिकायत है तो वह संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है। उन्होंने सदाकत के रूस में होने के दावे की न तो पुष्टि की और न ही उसका खंडन किया। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर तथ्यों के आधार पर जांच की जाएगी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बिहार सरकार ने नीट पेपर लीक के विरोध में हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने का फैसला किया है। गृह विभाग की अधिसूचना जारी होने के बाद आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

गौरतलब है कि 25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान कई जिलों में प्रदर्शन, सड़क जाम और पुलिस से झड़प की घटनाएं हुई थीं। इस दौरान सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया और कई एफआईआर दर्ज की गईं। अब रूस में होने का दावा करने वाले युवक का वीडियो सामने आने के बाद एफआईआर की सत्यता, नामजदगी की प्रक्रिया और पुलिस जांच की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।














