बक्सर, 26 जुलाई (विक्रांत) हालिया छात्र-युवा आंदोलन के दबाव में सरकार के झुकने को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने ऐतिहासिक जीत बताते हुए संघर्ष को जारी रखने का ऐलान किया है। रविवार को पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार सिंह, शिवप्रकाश रंजन, जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार, सबीर कुमार सहित कई छात्र-युवा नेताओं ने कहा कि जब तक आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और गिरफ्तार नेताओं को रिहा नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

डॉ. अजीत कुमार सिंह ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर समझौते के बाद भी दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने बिहार बंद के बाद सिवान और छपरा में भाकपा-माले के पूर्व विधायक अमरजीत कुशवाहा सहित आइसा-आरवाईए के स्थानीय नेताओं के घरों पर पुलिस छापेमारी की कड़ी निंदा करते हुए सवाल उठाया कि यदि सरकार ने मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया था, तो फिर यह कार्रवाई किसके निर्देश पर की जा रही है। सम्मेलन में पुलिस हिरासत में बंद सभी नेताओं और छात्रों की बिना शर्त तत्काल रिहाई की मांग की गई।

नेताओं ने आरोप लगाया कि विधायक संदीप सौरभ, आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय, राज्य सचिव दीपकर मिश्र, राज्य उपाध्यक्ष सबा आफरीन, माले के मीडिया प्रभारी कुमार दिव्यम सहित कई नेताओं को जेल भेज दिया गया है। आंदोलन का समर्थन करने वाले राजद नेता तेज प्रताप यादव और विधायक गौतम कृष्ण की गिरफ्तारी की भी निंदा की गई। वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध को कुचलने का प्रयास लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। आइसा और आरवाईए ने आगामी आंदोलन की रणनीति भी घोषित की। संगठन के अनुसार, आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा बोरा 27 जुलाई से दो दिवसीय बिहार दौरे पर रहेंगी।

वह जेल में बंद छात्र नेताओं से मुलाकात करेंगी, लाठीचार्ज में घायल छात्रों का हाल जानेंगी तथा विभिन्न छात्र संगठनों के साथ बैठक कर आंदोलन की अगली रूपरेखा तय करेंगी। इसके साथ ही 30 जुलाई को पूरे बिहार में “विरोध दिवस” मनाने और पालीगंज में व्यापक चक्का जाम करने की घोषणा की गई। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि गिरफ्तार साथियों की शीघ्र रिहाई और मुकदमों की वापसी नहीं हुई तो आंदोलन को पूरे राज्य में और अधिक व्यापक एवं तेज किया जाएगा।














