बेतिया, 21 जुलाई (विनय कुमार गुप्ता) इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित ऐतिहासिक गंडक बराज में नेपाल से लगातार आ रहे पानी के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार दोपहर दो बजे तक बराज से एक लाख 36 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज किया गया, जिससे सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ की आशंका गहरा गई है। नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सिंचाई विभाग ने अपने सभी कर्मियों को हाई अलर्ट पर रखते हुए हालात पर लगातार नजर बनाए रखी है।गंडक बराज के अधिकारियों के अनुसार नेपाल के तराई और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के कारण बराज में पानी की आवक लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से पिछले तीन दिनों से जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सोमवार सुबह से जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और अनुमान है कि देर शाम तक यह एक लाख 50 हजार क्यूसेक के पार पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में पानी के डिस्चार्ज में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

जलस्तर बढ़ने के साथ ही तटवर्ती वन क्षेत्रों तथा उत्तर प्रदेश से सटे सीमावर्ती इलाकों में जलजमाव और बाढ़ का खतरा भी बढ़ गया है। प्रशासन ने संभावित प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने और नदी के किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की गई है। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से लक्ष्मीपुर रामपुरवा पंचायत के चकदहवा, कानही टोला, बीन टोली और ठाड़ी गांव में पानी घुसने की आशंका गहरा गई है। यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो नदी का पानी वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के चुलभठा जंगल में भी प्रवेश कर सकता है, जिससे वन्य जीवों के लिए भी गंभीर संकट पैदा होने की संभावना है।

सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता मोहम्मद इकबाल अनवर ने बताया कि गंडक बराज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए सभी कर्मचारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है तथा आवश्यकता के अनुसार कुछ फाटकों को आंशिक रूप से खोल दिया गया है। विभाग का कहना है कि नेपाल में वर्षा की स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।














