बक्सर, 20 जुलाई (विक्रांत) बक्सर जिले के डुमरांव नगर में सोमवार को पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के विरोध में छात्र-युवाओं का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। भाकपा माले, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के संयुक्त बैनर तले आयोजित आक्रोश दिवस के दौरान नगर के मुख्य मार्गों पर विशाल जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए इस्तीफे की मांग उठाई।

जुलूस का नेतृत्व कामरेड अजीत कुमार सिंह, नवीन कुमार, धर्मेंद्र सिंह यादव, बाबूलाल राम और प्रभात ने किया। पूरे मार्ग में “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो”, “एनटीए को भंग करो”, “नई शिक्षा नीति-2020 वापस लो”, “पेपर लीक से छात्रों की आत्महत्या की जवाबदेही तय करो” तथा “छात्र-युवाओं के संघर्ष को सलाम” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। बाद में जुलूस नगर पालिका कार्यालय के समक्ष सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता और संचालन भाकपा माले के केंद्रीय कमेटी सदस्य एवं बक्सर जिला सचिव नवीन कुमार ने किया।
कार्यक्रम को आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह, राज्य कमेटी सदस्य धर्मेंद्र यादव, सर्वेश पांडेय तथा सीपीआई नेता व जिला परिषद सदस्य केदार यादव ने संबोधित किया।डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र-युवा संसद मार्च के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और देशभर में उनके समर्थन में आंदोलन तेज हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक अभियान है।वक्ताओं ने दावा किया कि देश में पिछले सात वर्षों में 70 से अधिक पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं और इससे अनेक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं से निराश होकर कई छात्र-छात्राएं आत्महत्या तक कर चुके हैं। प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर पर अनशनरत शिक्षाविद सोनम वांगचुक और अन्य छात्रों से तत्काल वार्ता करने तथा उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।कार्यक्रम में आइसा जिला सचिव अखिलेश ठाकुर, लक्ष्मण भारती, बाबूलाल राम, रिंकू कुरैशी, पीयूष यादव, मुखिया कृष्णा राम, देवेंद्र कुशवाहा, बंटी पटेल, नासिर हसन, ऊषा देवी, पूजा कुमारी समेत बड़ी संख्या में छात्र-युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।














