पटना, 30 जून (सहयोगी संवाददाता मोहम्मद जमशेद) राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बक्सर सांसद एवं किसान प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधाकर सिंह ने मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार सरकार पर भ्रष्टाचार के मामलों में बड़े अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कथित टेंडर घोटाले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) की कार्यप्रणाली और वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका को लेकर सरकार से जवाब मांगा। सुधाकर सिंह ने दावा किया कि कथित टेंडर घोटाले और तथाकथित ‘मिस्टर एक्स’ ठेकेदार मामले में में रे बड़े अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि ईडी के दस्तावेजों में आईएएस आनंद किशोर का नाम आने के बावजूद विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की कार्रवाई अपेक्षित स्तर पर नहीं दिख रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि जांच एजेंसी के रिकॉर्ड में किसी अधिकारी का उल्लेख है तो उससे विस्तृत पूछताछ क्यों नहीं की जा रही। राजद सांसद ने आरोप लगाया कि छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई हो रही है, जबकि प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता जानना चाहती है कि आखिर “बड़ी मछलियों” को बचाने का आदेश किस स्तर से दिया जा रहा है।प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने वर्ष 2017 के बाद बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि समिति का बजट वर्षों में कई गुना बढ़ा, लेकिन खर्च और ऑडिट रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया।

उन्होंने मांग की कि वर्ष 2017 से अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन, निविदाएं, संविदा नियुक्तियां, परीक्षा संचालन, आईटी परियोजनाएं और बायोमेट्रिक कार्यों की स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। सुधाकर सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ निजी कंपनियों को बार-बार लाभ पहुंचाया गया और संवेदनशील कार्य सौंपे गए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों के चयन, भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय सत्यापन पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।उन्होंने आईएएस अधिकारियों की नियुक्ति, सेवा विस्तार और विदेश यात्रा से जुड़े मामलों की भी जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोपों की जांच चल रही है तो उसे महत्वपूर्ण पद पर बनाए रखना उचित नहीं है। राजद सांसद ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ है तो उसे छोटे कर्मचारियों के साथ-साथ प्रभावशाली अधिकारियों और कथित रूप से जुड़े सभी लोगों पर भी समान रूप से कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति पर गंभीर सवाल उठते रहेंगे।
















