समस्तीपुर, 26 जून (मोहम्मद जमशेद) रेल पटरियों पर जहां एक पल की चूक बड़ा हादसा बन सकती है, वहीं समस्तीपुर रेल मंडल के लोको पायलटों ने अपनी सतर्कता, त्वरित निर्णय क्षमता और मानवीय संवेदनशीलता से चार लोगों की जान बचाकर मानवता की मिसाल पेश की है। पिछले दो महीनों में तीन अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाओं, एक बच्चे और एक युवक को आत्मघाती कदम उठाने से बचाया गया। इन सराहनीय कार्यों के लिए मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) ज्योति प्रकाश मिश्र ने संबंधित लोको पायलटों और सहायक लोको पायलटों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। रेल प्रशासन के अनुसार पहली घटना 22 जून को समस्तीपुर-सहरसा रेलखंड के सलौना और इमली स्टेशन के बीच हुई।

सहरसा जा रही 63346 सवारी गाड़ी के लोको पायलट अभय कुमार और सहायक लोको पायलट जय प्रकाश कुमार-1 ने ट्रैक पर एक महिला को उसके बच्चे के साथ लेटा देखा। दोनों ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोकी और दोनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। दूसरी घटना एक मई को ढेंग और रीगा स्टेशन के बीच हुई, जहां रक्सौल-दरभंगा सवारी गाड़ी (75230) के लोको पायलट पंकज कुमार और सहायक लोको पायलट श्रवण कुमार शर्मा ने ट्रैक पर लेटे एक लड़के की जान बचाई।तीसरी घटना 22 मई को रक्सौल-सिकटा रेलखंड पर हुई। मालगाड़ी के लोको पायलट मनोज कुमार-2 और सहायक लोको पायलट मणिभूषण कुमार गुड्डू ने ट्रैक पर बैठी महिला को देखकर समय रहते ट्रेन रोकी।

सहायक लोको पायलट ने महिला के बच्चे को सुरक्षित हटाया, जिसके बाद महिला भी पटरी से हट गई।डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्र ने कहा कि इन रेलकर्मियों ने केवल ट्रेनें नहीं रोकीं, बल्कि चार परिवारों की खुशियां बचाईं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण रेलवे की उत्कृष्ट कार्यसंस्कृति का प्रतीक है।
















