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पटरी पर मौत से जंग: समस्तीपुर मंडल के लोको पायलट बने जीवनरक्षक, तीन बड़ी घटनाओं में बचाई अनमोल जानें

समस्तीपुर, 24 जून ( हर्षिता “अश्क”) भारतीय रेल के लोको पायलट और सहायक लोको पायलट केवल ट्रेनों के सुरक्षित एवं समयबद्ध संचालन तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि संकट की घड़ी में मानवीय संवेदनाओं का परिचय देकर लोगों की जान बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में हाल के दिनों में हुई तीन अलग-अलग घटनाओं ने रेलकर्मियों की सतर्कता, सूझबूझ और मानवता की मिसाल पेश की है। पहली घटना 22 जून 2026 को उस समय हुई जब ट्रेन संख्या 63346 समस्तीपुर-सहरसा सवारी गाड़ी सहरसा की ओर जा रही थी।

सलौना और इमली स्टेशनों के बीच लोको पायलट अभय कुमार एवं सहायक लोको पायलट जय प्रकाश कुमार-1 ने रेल पटरी पर एक महिला को अपने बच्चे के साथ लेटा देखा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चालक दल ने तत्काल इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को सुरक्षित दूरी पर रोक दिया। इसके बाद दोनों रेलकर्मी ट्रैक पर पहुंचे और महिला को समझाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। दूसरी घटना 1 मई 2026 की है।

ट्रेन संख्या 75230 रक्सौल-दरभंगा सवारी गाड़ी के ढेंग और रीगा स्टेशनों के बीच ट्रैक पर एक बालक लेटा हुआ दिखाई दिया। लोको पायलट पंकज कुमार और सहायक लोको पायलट श्रवण कुमार शर्मा ने तत्परता दिखाते हुए आपातकालीन ब्रेक लगाया, जिससे बच्चे की जान बच गई।वहीं, 22 मई 2026 को एक मालगाड़ी के चालक दल ने भी असाधारण सतर्कता का परिचय दिया। लोको पायलट मनोज कुमार-2 और सहायक लोको पायलट मनी भूषण कुमार ने ट्रैक पर लेटी एक महिला को देखकर भारी मालगाड़ी को समय रहते रोक दिया और महिला को सुरक्षित बाहर निकालकर ग्रामीणों के सुपुर्द किया।

इन सभी सराहनीय कार्यों के लिए मंडल रेल प्रबंधक ज्योति प्रकाश मिश्रा ने संबंधित लोको पायलटों एवं सहायक लोको पायलटों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर वरीय मंडल विद्युत अभियंता (परिचालन) संजय कुमार भी उपस्थित थे। रेलवे प्रशासन ने कहा कि इन रेलकर्मियों की सजगता और मानवीय संवेदना के कारण कई परिवार उजड़ने से बच गए।

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