मोतिहारी, 22 जून (गौरव कुमार गुप्ता) बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित एक अनोखा गांव इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ‘इंग्लिश गांव’ के नाम से प्रसिद्ध यह गांव अपनी अनूठी पहचान के कारण चर्चा में है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि करीब 51 बीघा भूमि में फैले इस पूरे गांव में रहने वाले अधिकांश लोग एक ही परिवार और एक ही वंश से जुड़े हुए हैं। कई पीढ़ियों से एक ही खानदान के लोग यहां निवास कर रहे हैं और आज भी उनकी पारिवारिक एकता गांव की सबसे बड़ी पहचान बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव का इतिहास अंग्रेजी शासनकाल से जुड़ा हुआ है।

गांव के वरिष्ठ नागरिक सुदामा सिंह बताते हैं कि उनके पूर्वज फली सिंह ब्रिटिश सरकार में सूबेदार थे। उन्होंने एक महत्वपूर्ण युद्ध में बहादुरी का परिचय दिया था, जिससे प्रभावित होकर अंग्रेजों ने उन्हें सम्मानस्वरूप 51 बीघा जमीन प्रदान की थी। बाद में इसी जमीन पर गांव की स्थापना हुई और धीरे-धीरे यह ‘इंग्लिश गांव’ के नाम से मशहूर हो गया।जानकारी के मुताबिक, कुल 51 बीघा जमीन में से लगभग 25 बीघा में लोगों के घर बने हुए हैं, जबकि शेष भूमि में खेती और सड़कें मौजूद हैं। सुदामा सिंह के अनुसार फली सिंह के चार पुत्र थे, जिनमें से तीन पुत्रों के परिवारों ने इस गांव को बसाया। यही कारण है कि गांव के अधिकांश लोग आपस में रिश्तेदार हैं।

इस गांव को राजपूतों का गांव भी कहा जाता है और फली सिंह को ‘राय’ की उपाधि भी अंग्रेजों द्वारा ही प्रदान की गई थी। गांव की बसावट और सामाजिक संरचना इसे अन्य गांवों से अलग बनाती है। यहां परिवार की कई पीढ़ियां एक-दूसरे के करीब रहती हैं, जिससे सामाजिक एकजुटता मजबूत बनी रहती है। सुख-दुख के हर अवसर पर पूरा गांव एक परिवार की तरह साथ खड़ा नजर आता है। खेती यहां की मुख्य आजीविका है, जबकि नई पीढ़ी शिक्षा और रोजगार के लिए बाहर जा रही है। इसके बावजूद अपनी मिट्टी और पारिवारिक जड़ों से उनका जुड़ाव आज भी बरकरार है।

















