गोरखपुर, 20 जून (अंकित यादव) बहुप्रतीक्षित असुरन-पिपराइच फोरलेन परियोजना वन भूमि और अधिग्रहण संबंधी अड़चनों में उलझती नजर आ रही है। परियोजना के दायरे में आने वाले वन क्षेत्र के बदले खजनी तहसील में जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। संबंधित भूमि का चिह्नीकरण कर उसे वन विभाग के नाम स्थानांतरित किया जाएगा, जिसके बाद विभाग केंद्र सरकार के पोर्टल पर विवरण दर्ज कर वन क्षेत्र में सड़क निर्माण की अनुमति मांगेगा। अनुमति मिलने के बाद ही पेड़ों की कटान और सड़क निर्माण का रास्ता साफ होगा। 19.485 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन का निर्माण कार्य 11 फरवरी 2025 को शुरू हुआ था। डेढ़ वर्ष में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन मौजूदा हालात में 10 अगस्त तक कार्य पूरा होना मुश्किल दिख रहा है।

वन क्षेत्र की अनुमति लंबित है, वहीं प्रस्तावित ओवरब्रिज और अंडरपास का काम भी शुरू नहीं हो सका है।परियोजना के लिए 2828 भवनों और भूखंडों का अधिग्रहण प्रस्तावित था, लेकिन अब भी 300 से अधिक मामलों में रजिस्ट्री नहीं हो सकी है। असुरन से पादरी बाजार और पिपराइच कस्बे तक अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। पिपराइच में सड़क की चौड़ाई को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध भी सामने आ रहा है। लोगों का आरोप है कि पहले 10.5 मीटर चौड़ाई पर सहमति बनी थी, जबकि अब 12.5 मीटर के आधार पर चिह्नांकन किया जा रहा है।फोरलेन का एक किलोमीटर हिस्सा जंगल तिनकोनिया नंबर-3 से होकर गुजरना है, जिससे 2.56 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित होगी।

नियमों के तहत इसके बदले बराबर भूमि वन विभाग को उपलब्ध करानी होगी। पिछले लगभग एक वर्ष से खजनी में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन मामला अब तक कागजी कार्रवाई में अटका रहा। दूसरी ओर पादरी बाजार पुलिस चौकी से ताजपिपरा चौराहे तक करीब 15 किलोमीटर हिस्से में निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है। ताजपिपरा में सड़क चौड़ीकरण के लिए दो दर्जन से अधिक दुकानों को खाली कराया जा रहा है। नगर पंचायत पिपराइच की चहारदीवारी और जंगल धूषड़ पुलिस चौकी भी निर्माण में बाधा बनी हुई हैं। हालांकि तुरा बाजार और छितौनी में दो बड़े पुलों का निर्माण शुरू हो चुका है, लेकिन कई मोर्चों पर अड़चनें बरकरार रहने से परियोजना की समयसीमा पर सवाल खड़े हो गए हैं।


















