नालंदा, 16 जून (अविनाश पांडेय) हिलसा के बड़ी दरगाह मैदान में नौजवान कमेटी के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय अजीमुश्शान जलसा इस्लाहे मुआशरा एवं करबला कॉन्फ्रेंस में धार्मिक आस्था, सामाजिक जागरूकता और भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिला। सोमवार रात शुरू हुआ यह भव्य कार्यक्रम देर रात तक चला, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित उलेमाओं ने करबला के शहीदों की कुर्बानी, इस्लामी शिक्षाओं और सामाजिक सुधार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मंच से समाज में बढ़ रही दहेज प्रथा, नशाखोरी, आपसी वैमनस्य और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई तथा लोगों से इन कुरीतियों से दूर रहने की अपील की गई। जलसे में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव महफूज रहमानी, सीतामढ़ी के कारी मुजाहिद हसनैन हबीबी, दार्जिलिंग के मुफ्ती सादून नजीब कासमी तथा बंगाल के कारी शमशाद रायन सहित कई नामचीन उलेमा मौजूद रहे। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि करबला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और मानवता की रक्षा का जीवंत संदेश है। उन्होंने लोगों से सब्र, इंसाफ, अमन और भाईचारे के रास्ते पर चलने का आह्वान किया।

नौजवान कमेटी के सदस्य एवं राजद नगर अध्यक्ष मोहम्मद परवेज आलम ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और शोहदा-ए-करबला की कुर्बानियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम समाज को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष और मानवता की रक्षा की प्रेरणा देती है।कार्यक्रम के दौरान धार्मिक तकरीरों को सुनने के लिए देर रात तक लोगों की भीड़ जुटी रही। इस अवसर पर मोहम्मद शारिक आलम, मोहम्मद शफी आलम, मोहम्मद आरिफ आलम, मोहम्मद रुस्तम आलम, मोहम्मद नौशाद आलम, मोहम्मद मुजफ्फर आलम सहित सैकड़ों श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।













