पटना, 16 जून (पटना डेस्क) भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर भारी वाहनों की नो-एंट्री लागू होने के बाद मुंगेर के श्रीकृष्ण सेतु को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बड़ा निर्णय लिया है। तकनीकी जांच और विशेषज्ञों के आकलन के बाद डबल डेकर श्रीकृष्ण सेतु से 55 टन तक के भारी ट्रकों और मालवाहक वाहनों के परिचालन को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। हालांकि इस मंजूरी के साथ सुरक्षा को लेकर कई कड़े नियम भी लागू किए गए हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनीष कुमार ने बताया कि पुल के लिए सबसे बड़ा खतरा भारी वाहनों के गुजरने से नहीं, बल्कि उनके लंबे समय तक एक ही स्थान पर खड़े रहने से होता है।

घंटों तक भारी लोड वाले ट्रकों के खड़े रहने से पुल के बीम, पिलर और सस्पेंशन सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे संरचनात्मक जोखिम बढ़ सकता है। इसी कारण पहले रेलवे की ओर से केवल 20 टन तक के भार वाले वाहनों को ही अनुमति दी गई थी। नई व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पुल पर वाहनों का आवागमन बिना रुकावट जारी रहे। यदि किसी कारणवश आगे जाम की स्थिति बनती है तो भारी ट्रकों को पुल पर चढ़ने से पहले ही अप्रोच रोड पर रोक दिया जाएगा, ताकि पुल पर अतिरिक्त भार का दबाव न पड़े। इस फैसले के बाद एक अहम सवाल भी उठ खड़ा हुआ है। पिछले करीब डेढ़ महीने से 55 टन तक के भारी वाहन इस पुल से लगातार गुजर रहे थे।

ऐसे में जब तक आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली थी, तब परिवहन विभाग, स्थानीय पुलिस और एनएचएआई किस आधार पर इन वाहनों को पुल पार करने दे रहे थे, यह चर्चा का विषय बन गया है।उधर, ओवरलोडिंग पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए मुंगेर की ओर सरकारी धर्मकांटा स्थापित किया जाएगा। सोमवार से इसके निर्माण कार्य की शुरुआत होने की बात कही गई है। धर्मकांटा चालू होने के बाद हर वाहन का डिजिटल वजन किया जाएगा और 55 टन से अधिक वजन वाले किसी भी ट्रक को पुल पर प्रवेश नहीं मिलेगा। वहीं स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि रात 11 बजे के बाद निगरानी कमजोर पड़ते ही 65 से 70 टन तक के ओवरलोडेड ट्रक कथित सांठगांठ के सहारे पुल पार कर रहे हैं। इन आरोपों ने पुलिस व्यवस्था और पुल सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।













