गोरखपुर, 11 जून (अंकित यादव) महानगर में खुले नाले अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। फातिमा रोड स्थित खुले नाले में गिरकर एक युवक की मौत के बाद नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद निगम ने आनन-फानन में नाले के किनारे हरे रंग का जाल लगवा दिया, लेकिन शहर के कई अन्य इलाकों में आज भी खुले नाले लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। पादरी बाजार से फातिमा रोड की ओर बढ़ते ही सड़क किनारे खुला गहरा नाला लोगों को भयभीत कर देता है। राहगीरों का कहना है कि नाले के पास से गुजरते समय हमेशा दुर्घटना का डर बना रहता है। रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार आए दिन पशु नाले में गिरते रहते हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। एक स्थलीय निरीक्षण में शहर के कई संवेदनशील स्थानों पर खुले नालों की समस्या सामने आई। गीता प्रेस रोड पर माया सिनेप्लेक्स के पास सड़क किनारे बना गहरा नाला आंशिक रूप से स्लैब से ढका है, जबकि अधिकांश हिस्सा खुला पड़ा है। रात में यहां पर्याप्त रोशनी भी नहीं रहती, जिससे हादसे की आशंका और बढ़ जाती है। साहबगंज जाने वाली गली, रेती रोड से कोतवाली मार्ग और पादरी बाजार क्षेत्र के नहर रोड, मिलन चौक, संगम चौराहा, बैंक कॉलोनी तथा व्यास नगर तक फैले प्राकृतिक नालों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। कई जगहों पर सड़क और पुलिया के बीच बड़ा गैप है, जबकि नाले सिल्ट से भरे हुए हैं।

स्थानीय निवासी शनि साहनी ने बताया कि फातिमा बाईपास रोड स्थित खुले नाले में पिछले एक वर्ष के दौरान तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं सुनैना वर्मा ने कहा कि यदि नाले के किनारे बैरिकेडिंग होती तो हालिया हादसे में युवक की जान बच सकती थी। स्थानीय दुकानदार मो. सैफ का कहना है कि वर्षों से नाले के निर्माण और स्लैब लगाने की मांग की जा रही है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही बैरिकेडिंग और ढक्कन लगाने की व्यवस्था नहीं हुई तो ये खुले नाले आगे भी मौत के जाल साबित होते रहेंगे।

















