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आरआरबी गोरखपुर फिर विवादों में: ज्वाइनिंग को लेकर चेयरमैन और पूर्व सेना अधिकारी आमने-सामने, फिर खुली भर्ती घोटाले की परतें

गोरखपुर, 07 जून (अंकित यादव) रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) गोरखपुर एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। फर्जी भर्ती और नियुक्ति घोटालों की जांच अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अब नर्सिंग सुपरिटेंडेंट की ज्वाइनिंग को लेकर नए चेयरमैन और एक पूर्व सेना अधिकारी के बीच टकराव ने रेलवे महकमे में हलचल मचा दी है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक समेत उच्च अधिकारियों से शिकायत की है, जिससे मामला चर्चा का विषय बन गया है। पूर्व सेना अधिकारी मेजर नेहा सिंह ने रेलवे भर्ती बोर्ड के अध्यक्ष पंकज जायसवाल पर दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का आरोप लगाया है। उन्होंने महाप्रबंधक को भेजे गए पत्र और ई-मेल में मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

दूसरी ओर, चेयरमैन पंकज जायसवाल ने प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (पीसीपीओ) को पत्र लिखकर मेजर नेहा सिंह पर अनावश्यक दबाव बनाने तथा कार्यालय का माहौल प्रभावित करने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों के आरोपों के बीच ज्वाइनिंग प्रक्रिया में हो रही देरी पर भी सवाल उठ रहे हैं।इस नए विवाद ने आरआरबी गोरखपुर के पुराने भर्ती घोटालों की यादें ताजा कर दी हैं। वर्ष 2018-19 में सहायक लोको पायलट (एएलपी) भर्ती प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। आरोप है कि लिखित परीक्षा, पैनल निर्माण, मेडिकल परीक्षण और दस्तावेज सत्यापन तक में हेराफेरी कर मनमाने ढंग से नियुक्तियां की गई।

मामले के खुलासे के बाद रेलवे बोर्ड ने नवंबर 2022 में तत्कालीन चेयरमैन को पद से हटा दिया था और सीबीआई जांच शुरू हुई थी। इसके बाद भी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। वर्ष 2024 में जारी एक पैनल में कथित तौर पर दो कर्मचारियों के बेटों के नाम फर्जी तरीके से शामिल कर नियुक्ति दिए जाने का मामला सामने आया। आरोप है कि बिना आवेदन, परीक्षा और मेडिकल प्रक्रिया पूरी किए उन्हें नौकरी दिलाई गई। मामले के उजागर होने पर कई कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, कुछ का तबादला किया गया और कुछ को मूल विभागों में भेजा गया।लगातार सामने आ रहे विवादों और आरोपों ने आरआरबी गोरखपुर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों और रेलवे प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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