पटना, 02 जून (अविनाश कुमार) बिहार में पेयजल व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में खराब पड़े सभी चापाकलों को 15 जून तक हर हाल में दुरुस्त करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आम लोगों को शुद्ध पेयजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में जनहित, सीमावर्ती सुरक्षा, कृषि योजनाओं तथा विभिन्न महत्वपूर्ण सर्वेक्षणों की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों को “मिशन मोड” में कार्य करने का निर्देश दिया।

उन्होंने पीएचईडी को तत्काल अतिरिक्त मैनपावर की व्यवस्था करने को कहा ताकि मरम्मत और रखरखाव कार्य समय पर पूरा हो सके।वर्तमान मौसम और संभावित जल संकट को देखते हुए दक्षिण बिहार के जिलों को प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने विभाग के सभी कार्यपालक अभियंताओं को कार्यालयों तक सीमित न रहकर सीधे जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी करने का आदेश दिया।

अभियान की दैनिक प्रगति रिपोर्ट पीएचईडी के प्रधान सचिव राजेश कुमार को सौंपने का निर्देश भी दिया गया।वहीं, “फार्मर रजिस्ट्री” और “पीएम-किसान” योजना की समीक्षा के दौरान धीमी प्रगति पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई। 86.36 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 51.58 लाख किसानों का पंजीकरण हो पाया है। उन्होंने जिलाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और हलका कर्मचारियों को लंबित आवेदनों की रोजाना निगरानी कर शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।















