Image

उनकी निगाहों से खौफ़ आता है

आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में आर के जैन “राकेश” जी की एक ग़ज़ल

न बेरुखी न जफ़ाओं से खौफ़ आता है!

मुझे तो उनकी निगाहों से खौफ़ आता है!

अंधेरी रात में देखा है आशियाँ जलता,

इसी लिए तो चरागों से खौफ़ आता है !

अमीर ए शह्र पे कैसे यकीन कर ले कोई,

सभी को उसकी मिसालों से खौफ़ आता है!

बहार जब से गई उनके साथ गुलशन की,

यकीन मानो ख़िजांओं से खौफ़ आता है!

जो लेके आए हैं मरहम लगा के ज़ख्म मुझे,

मुझे तो ऐसे ही यारों से खौफ़ आता है!

ख़ुदा को कैसे दिखाऊँ गा मुँह क़यामत में,

यह सोच कर ही गुनाहों से खौफ़ आता है!

बनोगे कैसे सुखनवर जहाँ में तुम “राकेश”,

तुम्हें तो अब भी किताबों से खौफ़ आता है!

~ आर के जैन “राकेश”

Releated Posts

भारत की नारियाँ

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली से सुप्रसिद्ध कवयित्री अंशु विनोद गुप्ता जी की…

ByByअशोक अश्क जुलाई 2, 2026

नशे में नशा कर रहे हो

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में बिहार, समस्तीपुर से सुप्रसिद्ध कवि प्रवीण कुमार ‘चुन्नू’ जी की एक ग़ज़ल…

ByByअशोक अश्क जून 24, 2026

रात दिन रहता है तेरी याद का दफ्तर खुला

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में पश्चिम बंग, आसनसोल से सुप्रसिद्ध शायरा ग़़ज़ाला तबस्सुम जी की एक ग़ज़ल…

ByByअशोक अश्क जून 21, 2026

पापा

आज साहित्यिक आँगन गीत गुंजन में बिहार, बेगूसराय से सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ सुनीता ‘सुमन’ जी की एक कविता…

ByByअशोक अश्क जून 20, 2026

Leave a Reply

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top