बेतिया, 05 मई (विनय कुमार गुप्ता) पश्चिम चंपारण के बगहा-2 अंचल में एक विधवा की दशकों पुरानी जमाबंदी रद्द करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें भू-माफिया की साठगांठ और प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर आशंका जताई जा रही है। मामले में सीओ सह सहायक बंदोबस्ती पदाधिकारी बृजबिहारी कुमार पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। जिलाधिकारी तरनजोत सिंह के निर्देश पर एडीएम बेतिया राजीव कुमार सिन्हा ने सीओ से स्पष्टीकरण तलब किया है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक, पोखरभिंडा गांव की रहने वाली मनोरमा देवी ने 32 वर्ष पहले उक्त जमीन खरीदी थी और तब से उस पर काबिज हैं।

पीड़िता का आरोप है कि भू-माफिया के दबाव में आकर सीओ और कंप्यूटर ऑपरेटर ने नियमों की अनदेखी करते हुए उनकी जमाबंदी निरस्त कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि यह मामला पहले से एडीएम न्यायालय में लंबित था और 22 अप्रैल को डीसीएलआर के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक भी लगाई जा चुकी थी। इसके बावजूद 28 अप्रैल को जल्दबाजी में जमाबंदी रद्द कर दी गई। सोमवार को डीएम के जनता दरबार में मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया। डीएम तरनजोत सिंह ने फोन पर ही सीओ को कड़ी फटकार लगाई और तत्काल प्रभाव से जमाबंदी बहाल करने का आदेश जारी कर दिया।

जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इलाके में जमीन की बढ़ती कीमतों के चलते भू-माफिया सक्रिय हो गए हैं और फर्जी दावेदार खड़े कर जमीन कब्जाने की साजिश रच रहे हैं। पीड़िता ने अंचल और डीसीएलआर कार्यालय की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई है। इस प्रकरण ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह जमीन पहले भी विवादों में रह चुकी है। वर्ष 2007 में पुलिस लाइन निर्माण के लिए इसका अधिग्रहण किया गया था, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने अधिग्रहण को निरस्त कर जमीन रैयतों को लौटाने का आदेश दिया था। अब जमीन वापस मिलने के बाद एक बार फिर भू-माफिया की नजरें इस पर टिक गई हैं। डीएम ने स्पष्ट कहा है कि दोषियों की जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और पीड़िता को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा।













