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लापरवाह अफसरों पर डीएम का कहर: 126 मामलों में 3.47 लाख का जुर्माना, 25 पर कार्रवाई की सिफारिश

पटना, 05 में (अविनाश कुमार) बिहार में लोक शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 126 मामलों में कुल 3 लाख 47 हजार 800 रुपये का आर्थिक दंड ठोका। इतना ही नहीं, 25 अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा कर स्पष्ट संदेश दे दिया कि जनता के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीएम ने बताया कि अब तक 2 लाख 92 हजार 900 रुपये की राशि जमा कराई जा चुकी है, जबकि शेष राशि जल्द जमा कराने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा में जुर्माना नहीं भरने पर संबंधित अधिकारियों के वेतन से सीधे कटौती की जाएगी।

उन्होंने दो टूक कहा कि लोक शिकायतों का सिर्फ निपटारा नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण निष्पादन और आम जनता की संतुष्टि सुनिश्चित करना अनिवार्य है। समीक्षा बैठक के दौरान डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर आवेदन का समयबद्ध और प्रभावी समाधान हो। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है, उनकी जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले समय की तुलना में शिकायतों के निष्पादन में सुधार हुआ है और लंबित मामलों में कमी आई है। आंकड़ों के मुताबिक, गत सप्ताह जिले में 165 नए मामले आए, जबकि 218 मामलों का निष्पादन किया गया। खास बात यह रही कि कोई भी मामला 60 कार्य दिवस की समय सीमा से पार नहीं गया। प्रथम अपील के 12,200 मामलों में से 11,934 का निष्पादन हो चुका है, जबकि द्वितीय अपील के 4,683 मामलों में से 4,512 का समाधान कर दिया गया है। डीएम ने आरटीपीएस मामलों में भी सख्ती दिखाई।

22 आवेदन समयसीमा के बाद भी लंबित पाए गए, जिनमें दानापुर, फुलवारीशरीफ, मोकामा, अथमलगोला और बिहटा के मामले शामिल हैं। इस पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगते हुए चेतावनी जारी की गई है। अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों में प्रति आवेदन जुर्माना लगाकर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। बैठक में यह भी सामने आया कि दानापुर अनुमंडल में 125 सुनवाइयों में से 6 मामलों में लोक प्राधिकार अनुपस्थित रहे। इसमें बिहटा थानाध्यक्ष चार बार और दानापुर के बीडीओ दो बार गैरहाजिर पाए गए। डीएम ने दोनों से स्पष्टीकरण मांगते हुए सख्त चेतावनी दी।डीएम ने कहा कि अब अपीलीय प्राधिकार स्वयं मामलों की सुनवाई करेंगे और दोषी अधिकारियों पर सीधे कार्रवाई करेंगे। साथ ही, भूमि विवादों के समाधान के लिए संयुक्त बैठकों को अनिवार्य बताते हुए उनकी रिपोर्ट भू-समाधान पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया गया है।प्रशासन के इस कड़े रुख से साफ है कि अब लापरवाही पर लगाम कसने के लिए “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है, जिससे आम जनता को समय पर न्याय मिल सके।

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