रांची, 29 अप्रैल (मोहन शर्मा) राजधानी रांची के निजी स्कूलों में सत्र 2026-27 के लिए की गई भारी फीस वृद्धि को लेकर अभिभावकों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले बुधवार को अध्यक्ष अजय राय ने उपायुक्त (DC) रांची को ईमेल के जरिए विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए स्कूल प्रबंधन और प्रशासन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शहर के अधिकांश निजी स्कूलों ने आपसी सांठगांठ कर फीस में मनमानी बढ़ोतरी की है। ट्यूशन फीस के साथ-साथ एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट फीस और कंप्यूटर फीस जैसे मदों के नाम पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवार आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं।

अभिभावकों का कहना है कि इस मुद्दे पर जिला प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति तब और गंभीर हो गई, जब 21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित बैठक बिना सूचना के टाल दी गई। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। एसोसिएशन ने कानूनी पहलुओं का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 के तहत गठित जिला स्तरीय फीस निर्धारण समिति की एक भी बैठक अब तक नहीं हुई है। ऐसे में स्कूलों की मनमानी पर लगाम कैसे लगेगी, यह बड़ा सवाल बन गया है। इसके अलावा कई स्कूल CBSE और ICSE के दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं।

आरोप है कि स्कूल अपनी वेबसाइट पर पुस्तकों की सूची तक जारी नहीं कर रहे, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। ‘सिंगल वेंडर’ व्यवस्था को लेकर भी अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उन्हें एक ही दुकान से महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। एसोसिएशन ने मांग की है कि फीस समिति की तत्काल बैठक बुलाई जाए, अवैध वसूली की जांच हो और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। चेतावनी दी गई है कि मांगें नहीं मानी गईं तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

















