नई दिल्ली, 29 अप्रैल (अशोक “अश्क”) आपने रेल यात्रा के दौरान ट्रेनों को गुजरते हुए जरूर देखा होगा, लेकिन क्या कभी ध्यान दिया है कि आखिरी डिब्बे के पीछे पीले या सफेद रंग का ‘X’ क्यों बना होता है? भारतीय रेलवे की इस छोटी-सी दिखने वाली निशानी के पीछे सुरक्षा का बेहद बड़ा विज्ञान छिपा है, जो हजारों यात्रियों की जान की हिफाजत करता है।दरअसल, ट्रेन के अंतिम कोच पर बना ‘X’ रेलवे कर्मचारियों के लिए एक अहम संकेत होता है। इसका सीधा मतलब होता है कि पूरी ट्रेन सुरक्षित रूप से गुजर चुकी है और कोई भी डिब्बा पीछे नहीं छूटा है।

जब कोई ट्रेन स्टेशन से गुजरती है, तो स्टेशन मास्टर इस निशान को देखकर सुनिश्चित करता है कि गाड़ी पूरी तरह सही स्थिति में है। अगर यह ‘X’ नजर नहीं आता, तो यह तुरंत खतरे की घंटी मानी जाती है।सोचने वाली बात यह है कि दिन में तो यह निशान साफ दिख जाता है, लेकिन रात या कोहरे में इसे कैसे पहचाना जाता है? इसके लिए रेलवे ने खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। आखिरी डिब्बे पर ‘X’ के नीचे लाल रंग की एलईडी लाइट लगाई जाती है, जो लगातार ब्लिंक करती रहती है। अंधेरे या धुंध के समय यही लाइट कर्मचारियों को बताती है कि यह ट्रेन का अंतिम हिस्सा है।

यही नहीं, ‘X’ के साथ अक्सर एक छोटा-सा बोर्ड भी लगा होता है, जिस पर ‘LV’ लिखा होता है। ‘LV’ का मतलब होता है ‘Last Vehicle’। यह भी उसी उद्देश्य को पूरा करता है, यानी यह सुनिश्चित करना कि ट्रेन का आखिरी डिब्बा मौजूद है। नियमों के अनुसार, हर ट्रेन के अंतिम कोच पर यह संकेत होना अनिवार्य है, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।अगर किसी स्टेशन से गुजरती ट्रेन में ‘X’, ‘LV’ बोर्ड या ब्लिंकिंग लाइट में से कोई भी संकेत नजर नहीं आता, तो यह एक आपातकालीन स्थिति मानी जाती है। इसका मतलब हो सकता है कि ट्रेन के कुछ डिब्बे रास्ते में ही अलग हो गए हैं और पटरी पर छूट गए हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी किया जाता है और रेलवे टीम तेजी से कार्रवाई करती है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, कई बार छोटी-सी लापरवाही बड़े हादसों में बदल सकती है। ऐसे में ‘X’ जैसे साधारण दिखने वाले संकेत भी सुरक्षा की मजबूत कड़ी बन जाते हैं। कुल मिलाकर, अगली बार जब आप ट्रेन को गुजरते देखें, तो उसके आखिरी डिब्बे पर बने ‘X’ को जरूर नोटिस करें क्योंकि यही छोटा निशान यात्रियों की सुरक्षा का बड़ा पहरेदार है।

















