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अब अपराध नहीं छिपेगा: बिहार में फोरेंसिक क्रांति की तैयारी, NFSU कैंपस और CFSL लैब से जांच होगी सुपरफास्ट

पटना, 26 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार में अपराध जांच को हाईटेक और तेज बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। पटना जिले के पुनपुन स्थित डूमरी में राष्ट्रीय फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के ऑफ-कैंपस और केंद्रीय फोरेंसिक साइंसेज लैबोरेटरी (CFSL) की स्थापना को मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 50 एकड़ जमीन अधिग्रहण की स्वीकृति के साथ 287.16 करोड़ रुपये की राशि भी जारी कर दी गई है। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य जटिल आपराधिक मामलों की जांच को तेज और सटीक बनाना है।

अभी तक डीएनए टेस्ट, साइबर क्राइम विश्लेषण और अन्य वैज्ञानिक जांच के लिए बिहार को दूसरे राज्यों की प्रयोगशालाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे रिपोर्ट आने में देरी होती थी, जिसका सीधा असर न्यायिक प्रक्रिया और केस के निपटारे पर पड़ता था। नई फोरेंसिक लैब बनने के बाद राज्य में ही डीएनए जांच, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, साइबर क्राइम जांच, ड्रग्स और विस्फोटक परीक्षण जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही डिजिटल फोरेंसिक और क्राइम सीन के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए भी आधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे अपराध की तह तक पहुंचना आसान होगा।

NFSU के कैंपस की स्थापना से शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आएगा। यहां स्मार्ट क्लासरूम, रिसर्च लैब, लाइब्रेरी और हॉस्टल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिससे छात्रों को फोरेंसिक साइंस, साइबर सुरक्षा और व्यवहार विज्ञान जैसे विषयों में उच्चस्तरीय शिक्षा और प्रशिक्षण मिल सकेगा। यह परियोजना न सिर्फ अपराध जांच को नई गति देगी, बल्कि बिहार में तकनीकी शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे पुलिस, न्यायिक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों को भी आधुनिक प्रशिक्षण मिलेगा। फिलहाल बिहार में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में चार फोरेंसिक लैब कार्यरत हैं। सरकार अगले एक-दो वर्षों में 9 नई लैब स्थापित कर कुल संख्या 13 करने की योजना पर काम कर रही है। साथ ही पटना और राजगीर में साइबर फोरेंसिक लैब और 50 मोबाइल फोरेंसिक वैन भी पहले से सक्रिय हैं। इस फैसले के बाद साफ है कि बिहार अब अपराध जांच के क्षेत्र में नई तकनीकी क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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