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नवाचार से समृद्धि तक: बौद्धिक संपदा दिवस पर बीएयू में मंथन, पेटेंट-जीआई से कृषि क्रांति का रोडमैप तैयार

पटना, 26 अप्रैल (विक्रांत) बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (बीएयू) में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस के अवसर पर ऐसा मंथन हुआ, जिसने कृषि नवाचार को नई दिशा देने का संकेत दे दिया। निदेशालय अनुसंधान (DoR) में आयोजित उच्चस्तरीय विचार-विमर्श सत्र में वैज्ञानिकों, प्राचार्यों और विभागाध्यक्षों ने एक स्वर में कहा कि अब कृषि अनुसंधान को प्रयोगशाला से निकालकर सीधे किसानों के खेत तक पहुंचाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक अनुसंधान डॉ. ए.के. सिंह ने की। उन्होंने साफ कहा कि “भविष्य का कृषि अनुसंधान IPR आधारित, बाजार उन्मुख और प्रभाव केंद्रित होना चाहिए, तभी नवाचारों का असली लाभ किसानों तक पहुंचेगा।”

इस दौरान Technology Readiness Levels (TRL), उद्योग सहयोग और इनक्यूबेशन तंत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।विचार-विमर्श का मुख्य विषय “कृषि अनुसंधान एवं नवाचार में IPR पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना” रहा। विशेषज्ञों ने World Intellectual Property Organization की थीम “IP and Sports: Ready, Set, Innovate” के संदर्भ में खेल और कृषि के बीच दिलचस्प समानता पेश की। उन्होंने बताया कि जैसे खेल में अनुशासन और नवाचार प्रदर्शन को निखारता है, वैसे ही कृषि में नवाचार उत्पादकता बढ़ाता है, और IPR दोनों को सुरक्षा व पहचान देता है।

सत्र में बीएयू की उपलब्धियों ने सबका ध्यान खींचा। विश्वविद्यालय अब तक 23 पेटेंट, 24 कॉपीराइट, 1 ट्रेडमार्क और 5 GI हासिल कर चुका है, जो उसकी नवाचार क्षमता का मजबूत प्रमाण है। विशेषज्ञों ने आविष्कार प्रकटीकरण से लेकर लाइसेंसिंग, स्टार्टअप प्रोत्साहन और बाजार से जोड़ने तक की पूरी प्रक्रिया को और सुदृढ़ करने पर बल दिया। कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने अपने संदेश में कहा, “जब नवाचार को स्वामित्व और मूल्य में बदला जाता है, तभी उसकी असली ताकत सामने आती है।” उन्होंने जोर दिया कि मजबूत IPR प्रणाली न केवल तकनीक हस्तांतरण को बढ़ाएगी, बल्कि कृषि उद्यमिता और किसानों की आय में भी इजाफा करेगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंकेश कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चंदा कुशवाहा ने दिया। अंत में यह संकल्प लिया गया कि बीएयू को IPR आधारित कृषि नवाचार का अग्रणी केंद्र बनाया जाएगा, जहां शोध, संरक्षण और व्यावसायीकरण के जरिए किसानों की समृद्धि सुनिश्चित की जाएगी।

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