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महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम: डुमरांव में माले-ऐपवा का उग्र मार्च, केंद्र सरकार पर तीखा हमला

बक्सर, 24 अप्रैल (विक्रांत) डुमरांव में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सियासी तापमान अचानक बढ़ गया, जब भाकपा माले और अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध मार्च निकाला। शहर के भाकपा माले कार्यालय से शुरू हुआ यह मार्च मुख्य पथ, गोला रोड और शहीद पार्क होते हुए नया थाना पहुंचा, जहां यह एक बड़ी सभा में तब्दील हो गया। पूरे मार्च के दौरान “महिला आरक्षण लागू करो” और “सरकार का झूठा प्रचार बंद करो” जैसे नारों से माहौल गूंजता रहा।

सभा का संचालन माले नेता ललन राम ने किया, जबकि अध्यक्षता खेग्रामस जिला अध्यक्ष कन्हैया पासवान ने की। सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव नवीन कुमार ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2024 से ही लागू किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने इसमें जनगणना और परिसीमन की शर्त जोड़कर इसे टालने की साजिश की है। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अब 131वें संशोधन विधेयक के जरिए सीटों में 50% तक बढ़ोतरी करना चाहती है, जिससे दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा और देश के संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचेगा।

वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी राज्यों की सहमति जरूरी है, अन्यथा यह क्षेत्रीय असंतुलन को जन्म देगा। सभा में वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीति कर रही है। उनका कहना था कि जहां सीटों में 50% तक बढ़ोतरी की बात हो रही है, वहीं महिलाओं को सिर्फ 33% आरक्षण दिया जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने दलित और पिछड़ी महिलाओं के लिए भी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग उठाई।इस दौरान बक्सर जिले में बढ़ते अपराधों को लेकर भी आक्रोश जताया गया। खासतौर पर आरियाव में 15 वर्षीय छात्रा की दिनदहाड़े हत्या का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया।

नेताओं ने प्रशासन से दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की। मार्च का नेतृत्व धर्मेंद्र सिंह यादव, शंकर तिवारी, शैलेन्द्र पासवान, बाबूलाल राम समेत कई नेताओं ने किया। इस विरोध प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा बिहार की राजनीति में और तेज होने वाला है।

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