बेतिया, 24 अप्रैल (गौरव कुमार गुप्ता) सीमावर्ती इलाकों में वर्षों से पहचान के संकट से जूझ रही नेपाली मूल की बहुओं के लिए अब बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सरकार ने उनकी भारतीय नागरिकता की राह आसान कर दी है, जिससे हजारों महिलाओं के जीवन में नई उम्मीद जगी है। लंबे समय से अधिकारों से वंचित ये महिलाएं अब कानूनी रूप से अपनी पहचान स्थापित कर सकेंगी।

पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा प्रखंड में प्रशासन ने इस योजना को लागू करने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी है। अब वे महिलाएं, जिनकी शादी को सात साल या उससे अधिक समय हो चुका है, भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती हैं। इस पहल को सफल बनाने के लिए प्रशासन घर-घर जागरूकता अभियान चला रहा है, जिसमें जीविका दीदियों, विकास मित्रों और चौकीदार-दफादारों की अहम भूमिका तय की गई है।

बीडीओ अजीत कुमार रौशन के अनुसार, 24 अप्रैल को प्रखंड मुख्यालय समेत विभिन्न पंचायतों में विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे। इन कैंपों में महिलाएं आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी या आरटीपीएस काउंटर पर जाकर फॉर्म जमा कर सकती हैं। आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए निर्धारित वेबसाइट पर विवरण भरकर उसका प्रिंट आउट जमा करना अनिवार्य किया गया है।सरकार ने आवेदन शुल्क 1000 रुपये तय किया है और आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न करना भी जरूरी होगा।

जिन महिलाओं को ऑनलाइन आवेदन में कठिनाई होती है, वे नजदीकी साइबर कैफे या सीएससी सेंटर की मदद ले सकती हैं। इस फैसले के बाद इलाके में खुशी का माहौल है। वर्षों से पहचान की तलाश में भटक रहीं महिलाओं का कहना है कि अब उन्हें अपना हक मिलेगा और वे सम्मान के साथ खुद को भारतीय नागरिक कह सकेंगी। प्रशासन ने अपील की है कि सभी पात्र महिलाएं इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं, ताकि वे मुख्यधारा में शामिल होकर अपने अधिकारों का पूर्ण रूप से उपयोग कर सकें।













