कोलकाता, 23 अप्रैल ( सौरभ हलदार) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जहां रिकॉर्ड मतदान ने लोकतंत्र की ताकत दिखाई, वहीं छिटपुट हिंसा, हमलों और प्रशासनिक चूक ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गुरुवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल से फोन पर बातचीत कर जमीनी हालात की समीक्षा की। उन्होंने माना कि मतदान “अच्छी तरह से चल रहा है”, लेकिन “सुधार की गुंजाइश” अभी भी बाकी है।

निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 152 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 3.60 करोड़ मतदाताओं में से 91.83 प्रतिशत ने शाम 6 बजे तक मतदान किया। सुबह सात बजे शुरू हुई वोटिंग शाम छह बजे समाप्त हुई। हालांकि इस दौरान कई इलाकों से हिंसा और कम से कम तीन उम्मीदवारों पर हमले की खबरों ने प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी।मुर्शिदाबाद के नाओदा में हुमायूं कबीर से जुड़ी घटना के बाद विरोध प्रदर्शन भड़क उठा, जिसमें दो गुटों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया।

वहीं, निर्वाचन आयोग ने कुमारगंज से भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु सरकार और उनके मतदान एजेंट पर कथित हमले की रिपोर्ट तलब की है।केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठे। कई जगहों पर मतदाताओं और राजनीतिक दलों के एजेंटों ने उनकी अनुपस्थिति का आरोप लगाया। इस पर सीईओ ने जिला अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि केंद्रीय बलों को जरूरत पड़ने पर मतदान केंद्रों के 100 मीटर दायरे से बाहर भी तैनात किया जाए और हालात के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।

इधर, पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला विधानसभा क्षेत्र में एक बड़ी लापरवाही सामने आई, जहां बूथ संख्या-9 के सभी मतदानकर्मी दोपहर में खाना खाने के लिए एक साथ चले गए, जिससे बूथ कुछ समय के लिए खाली हो गया। इस गंभीर चूक पर निर्वाचन आयोग ने पीठासीन अधिकारी समेत सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और जांच के आदेश दे दिए।कुल मिलाकर, भारी मतदान के बावजूद बंगाल का पहला चरण विवादों और तनाव के साए में संपन्न हुआ।















