पटना, 15 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार में जमीन से जुड़े कामकाज को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब जमीन की मापी पूरी तरह डिजिटल तरीके से होगी और इसके लिए शुल्क भी तय कर दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने नई व्यवस्था लागू करते हुए साफ कर दिया है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ई-मापी के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं। नई व्यवस्था के तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन की ई-मापी कराने पर प्रति खेसरा 1000 रुपये शुल्क देना होगा।

वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह शुल्क 500 रुपये प्रति खेसरा तय किया गया है। विभाग का कहना है कि इस कदम से व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और मनमानी वसूली पर रोक लगेगी। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब जमीन मापी के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन करना होगा। इसके लिए लोगों को बिहारभूमि पोर्टल पर जाकर आवेदन भरना होगा। आवेदन के साथ शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन ही करना अनिवार्य किया गया है, जिससे प्रक्रिया को सरल और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की कोशिश की गई है।

सरकार का दावा है कि इस डिजिटल सिस्टम से आम लोगों को काफी राहत मिलेगी। अब जमीन मापी के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लोग घर बैठे आवेदन कर सकेंगे, फीस जमा कर सकेंगे और अपने आवेदन की स्थिति भी आसानी से ट्रैक कर पाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन विवादों में भी कमी आएगी। पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया के कारण विवादित मामलों का निपटारा आसान हो सकेगा। बिहार सरकार लगातार भूमि सेवाओं को डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है।

यह कदम उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य आम नागरिकों को तेज, आसान और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराना है।















