पटना, 12 अप्रैल (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर लगभग तय हो चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ओर से सत्ता परिवर्तन की पूरी पटकथा तैयार कर ली है। इस्तीफे से लेकर नई सरकार के गठन तक की तारीखें तय कर दी गई हैं। अब निगाहें भाजपा पर टिक गई हैं कि वह इस बदलाव को किस रूप में अमल में लाती है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को बी. आर. आंबेडकर जयंती के अवसर पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। जदयू ने भाजपा को 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन का प्रस्ताव भी भेज दिया है।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार सात सर्कुलर रोड स्थित आवास में रहेंगे, जहां उनका सामान भी भेजा जाने लगा है। शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। संभावित स्थलों में गांधी मैदान, लोकभवन और बापू सभागार शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस ऐतिहासिक मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित भाजपा के कई शीर्ष नेता मौजूद रह सकते हैं। इधर, जदयू कोटे से नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार के उपमुख्यमंत्री बनने की चर्चा जोरों पर है। हालांकि उन्होंने अभी अंतिम सहमति नहीं दी है, लेकिन पार्टी सूत्रों का दावा है कि वे जल्द ही हामी भर सकते हैं।

यदि ऐसा होता है तो नए चेहरों को भी मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है। भाजपा में मुख्यमंत्री पद को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। दावेदारों की लंबी सूची है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है। प्रस्तावित 36 सदस्यीय मंत्रिमंडल में भाजपा के 17, जदयू के 15 और अन्य सहयोगियों को शेष स्थान मिलने की संभावना है।हालांकि विधानसभा अध्यक्ष पद और विभागों के बंटवारे जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बननी बाकी है। बावजूद इसके, इतना तय है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन अब महज औपचारिकता बनकर रह गया है।

















