पटना, 07 अप्रैल (अविनाश कुमार) राजधानी पटना अब सिर्फ जमीन के ऊपर ही नहीं, बल्कि जमीन के नीचे भी विकास की नई इबारत लिख रहा है। शहर के व्यस्त राजेंद्र नगर टर्मिनल के नीचे इन दिनों इंजीनियरिंग का ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। ऊपर जहां रेलगाड़ियां अपनी रफ्तार से दौड़ रही हैं, वहीं ठीक नीचे पटना मेट्रो की सुरंगें चुपचाप आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनें (TBMs) जमीन की गहराइयों में लगातार खुदाई कर रही है।

यह सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, बल्कि तकनीक और सटीकता का शानदार प्रदर्शन है। चालू रेलवे ट्रैक के नीचे सुरंग बनाना इंजीनियरिंग की सबसे जटिल चुनौतियों में गिना जाता है, लेकिन यहां इसे बिना किसी बाधा के अंजाम दिया जा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस जोखिम भरे कार्य को सुरक्षित बनाने के लिए ‘ग्राउंड सपोर्ट सिस्टम’ और ‘सॉइल प्रेशर बैलेंसिंग’ जैसी उन्नत तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। इन तकनीकों की मदद से मिट्टी के दबाव को नियंत्रित रखा जाता है, जिससे ऊपर की जमीन और रेलवे ट्रैक पर कोई असर नहीं पड़ता। सुरक्षा के लिहाज से हर इंच पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम यह सुनिश्चित कर रहा है कि रेलवे परिचालन पूरी तरह प्रभावित न हो, आसपास की इमारतें सुरक्षित रहें और सुरंग का अलाइनमेंट पूरी तरह सटीक बना रहे। इंजीनियरों के लिए यह किसी ‘लाइव टेस्ट’ से कम नहीं है। यह भूमिगत कॉरिडोर मोइनुल हक मेट्रो स्टेशन से लेकर राजेंद्र नगर टर्मिनल मेट्रो स्टेशन तक फैला हुआ है, जो भविष्य में शहर के यातायात को पूरी तरह बदल देगा। जाम से जूझते पटना को यह परियोजना बड़ी राहत देने वाली है।विशेषज्ञ मानते हैं कि यह विकास न केवल आधुनिक तकनीक का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समर्पण और सटीक योजना के साथ असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो सकते हैं। आने वाले समय में पटना के लोग एक तेज, सुरक्षित और जाममुक्त सफर का अनुभव कर सकेंगे और यह सब संभव हो रहा है जमीन के नीचे चल रही इस ‘खामोश क्रांति’ की बदौलत।















