पटना, 02 अप्रैल (अविनाश कुमार) अब सेब की खेती सिर्फ कश्मीर और हिमाचल तक सीमित नहीं रही। बिहार के नालंदा में कृषि वैज्ञानिकों ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। बिहार एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह ने नूरसराय स्थित नालंदा उद्यान महाविद्यालय के दौरे के दौरान ‘हरमन-99’ प्रजाति के सेब से लदे करीब 40 पेड़ों को देखकर खुशी जाहिर की।

उन्होंने कहा कि नालंदा की जलवायु सेब की सघन बागवानी के लिए पूरी तरह अनुकूल है और आने वाले समय में इसे व्यावसायिक स्तर पर किसानों के खेतों तक पहुंचाने की योजना है। निरीक्षण के दौरान विश्वविद्यालय में चल रहे विभिन्न शोध कार्यों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान वैज्ञानिक Dr. Karanjeev द्वारा सिंघाड़ा की उन्नत खेती पर किए जा रहे शोध को सराहा गया। कुलपति ने जल्द ही महाविद्यालय में कमल पर विशेष रिसर्च सेंटर खोलने की घोषणा भी की।

साथ ही ब्लूबेरी और कैप गूजबेरी (मकोय) की नई प्रजातियों पर काम तेज करने के निर्देश दिए।फल वैज्ञानिकों ने बताया कि गर्म जलवायु में उगने वाला यह सेब दोमट बलुआही मिट्टी में बेहतर उत्पादन देता है। इसकी खासियत यह है कि नई टहनियों पर ही फूल और फल आते हैं, जिससे सघन खेती संभव होती है। दिसंबर-जनवरी में रोपण और मई-जून में फसल तैयार हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में उगाए गए सेब स्वाद और गुणवत्ता में भी बेहतर होंगे। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती है।















