बक्सर, 04 नवंबर (विक्रांत) बदलती जलवायु, अनियमित वर्षा और बाढ़ की मार झेल रहे किसानों के लिए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर से राहत भरी खबर सामने आई है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित धान की उन्नत प्रभेद ‘सबौर विभूति’ ने इस वर्ष लंबे समय तक जलजमाव की चुनौती के बीच शानदार प्रदर्शन किया है। अनुसंधान प्रक्षेत्र में 10 से 12 दिनों तक पानी में डूबे रहने के बावजूद फसल काफी हद तक सुरक्षित रही। प्रारंभिक आकलन में बाढ़ से महज 10 प्रतिशत तक नुकसान की संभावना जताई गई है। यह प्रदर्शन बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है। बुधवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने विभिन्न अनुसंधान प्रक्षेत्रों का निरीक्षण कर धान की उन्नत किस्मों, बीज उत्पादन कार्यक्रमों और नई प्रभेदों के विकास से जुड़े अनुसंधान कार्यों का जायजा लिया।

इस दौरान उन्होंने सबौर विभूति की फसल का विशेष निरीक्षण किया और इसके बेहतर प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त की। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित सबौर विभूति मुख्य रूप से झुलसा रोग के प्रति प्रतिरोधक क्षमता को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मध्यम अवधि में पकने वाली इस किस्म की औसत उपज क्षमता 55 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसका दाना और स्वरूप मंसूरी टाइप धान जैसा है, जिससे किसानों और उपभोक्ताओं के बीच इसकी उपयोगिता बढ़ती है।सबौर स्थित अनुसंधान प्रक्षेत्र में बीज उत्पादन के लिए लगभग तीन एकड़ में इसकी खेती की गई है। इस वर्ष बाढ़ और जलजमाव से धान की कई किस्मों को नुकसान पहुंचा, लेकिन सबौर विभूति की फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रही।

जीवाणुजनित झुलसा रोग से भी इसमें उल्लेखनीय क्षति नहीं देखी गई। कुलपति ने वैज्ञानिकों को विशेष फील्ड डे आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसमें आसपास के गांवों के किसानों को अनुसंधान प्रक्षेत्र में आमंत्रित कर सबौर विभूति सहित बेहतर प्रदर्शन करने वाली अन्य किस्मों की जानकारी दी जाएगी। किसान फसल की वास्तविक स्थिति देखकर वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर सकेंगे। पौधा रोग वैज्ञानिक डॉ. अमरेन्द्र कुमार ने बताया कि रोग प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली नई धान किस्मों के विकास पर अनुसंधान जारी है। वहीं, श्रीअन्न की छह संभावित किस्मों—सबौर मडुआ-1, सबौर मडुआ-2, सबौर कांगनी-1, सबौर सॉवा-1, सबौर कुटकी-1 और सबौर कोदो-1 के परीक्षण एवं गुणवत्ता मूल्यांकन को शीघ्र पूरा कर विमोचन प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।

कुलपति ने कहा कि अनुसंधान की उपलब्धियां किसानों तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की प्राथमिकता है। निरीक्षण के दौरान निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ. फिजा अहमद, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. एस. पी. सिंह, डॉ. महेश कुमार सिंह, डॉ. आनंद कुमार सहित अन्य वैज्ञानिक उपस्थित थे।













