बक्सर, 29 अक्टूबर (विक्रांत) बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में वासंतिक-रबी 2026-27 की 32वीं अनुसंधान परिषद की दो दिवसीय बैठक का गुरुवार को शुभारंभ हुआ। कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कृषि अनुसंधान की उपलब्धियों की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं पर मंथन किया गया। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, किसानों की लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने और कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। उद्घाटन सत्र में कुलपति ने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में कृषि उत्पादन को स्थिर बनाए रखना और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना अनुसंधान की प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए।

उन्होंने जलवायु-सहिष्णु फसल किस्मों, संसाधन संरक्षण, कार्बन फार्मिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। वैज्ञानिकों से स्थानीय परिस्थितियों और किसानों की वास्तविक समस्याओं को ध्यान में रखकर शोध योजनाएं तैयार करने को कहा।कुलपति ने बताया कि कृषि मंत्री ने विद्यार्थियों के व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए ‘अन्वेषण’ कार्यक्रम की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को स्वीकृति दी है। इसके तहत विद्यार्थियों के कौशल विकास और कृषि क्षेत्र में कार्यानुभव बढ़ाने पर जोर रहेगा। वानिकी महाविद्यालय के विद्यार्थियों को डिग्री के बाद वन विभाग में एक वर्ष तक आकस्मिक सहायता उपलब्ध कराने की पहल की भी जानकारी दी गई।
विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में लगभग 600 अनुसंधान परियोजनाओं पर काम चल रहा है। 25 से अधिक उत्पादों के भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीकरण की प्रक्रिया भी प्रगति पर है। उन्होंने अनुसंधान को स्टार्टअप, कृषि उद्यमिता और रोजगार सृजन से जोड़ने की आवश्यकता बताई।मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र सिंह ने कहा कि अनुसंधान की सार्थकता तभी है, जब वैज्ञानिक उपलब्धियां किसानों के खेतों तक पहुंचें और उनकी आय तथा जीवन स्तर में सुधार लाएं। पूर्व निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. पी. सिंह ने गुणवत्तापूर्ण शोध और वैज्ञानिक नवाचार को कृषि विकास का आधार बताया।

बैठक के पहले दिन दो तकनीकी सत्रों में गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन, आणविक जीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी तथा फल-सब्जी विज्ञान से जुड़े शोध प्रस्तुत किए गए। फसल उत्पादकता बढ़ाने, विविधीकरण, उन्नत तकनीकों और जैव प्रौद्योगिकी के उपयोग पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में आठ महत्वपूर्ण अनुसंधान प्रकाशनों और पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें बिहार में कृषि व्यवसाय, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खाद, खरीफ मक्का की उपज क्षमता और किसानों की पारंपरिक बीज किस्मों के संरक्षण से संबंधित प्रकाशन शामिल हैं।

बैठक का दूसरा दिन शुक्रवार, 30 अक्टूबर को आयोजित होगा। इसमें अनुसंधान योजनाओं और तकनीकी विषयों पर चर्चा जारी रहेगी।














