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समस्तीपुर में बाढ़ का कहर: 2.33 लाख लोग प्रभावित, 227 नावों से राहत-बचाव, 94 सामुदायिक रसोइयों में पक रहा भोजन

समस्तीपुर, 10 सितम्बर (हर्षिता “अश्क”) जिले में बाढ़ की विकराल स्थिति के बीच राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया गया है। परिवहन मंत्री-सह-प्रभारी मंत्री बिहार दामोदर राउत एवं जिलाधिकारी समस्तीपुर ने पत्थर घाट, रसलपुर (मोहनपुर), जमुनापुर समेत विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने जलस्तर, आवागमन, नावों के परिचालन, राहत सामग्री, सामुदायिक रसोई, स्वास्थ्य सेवाओं और पशुओं की व्यवस्था की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान मंत्री एवं जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को शिकायतों का तत्काल समाधान करने का निर्देश दिया। मौके पर मोहिउद्दीननगर विधायक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। जिले में अब तक करीब 2,33,212 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासनिक और राहत टीमें लगातार सक्रिय हैं।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। विस्थापित और प्रभावित लोगों के लिए जिले में 94 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। इनके माध्यम से अब तक 98,996 लोग भोजन कर चुके हैं। भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ पीड़ित परिवारों को अस्थायी आश्रय के लिए अब तक 32,515 पॉलिथीन शीट्स वितरित की जा चुकी हैं।

वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 22 मेडिकल कैंप लगाए गए हैं, जहां जांच, दवा और चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। पशुधन की सुरक्षा के लिए 17 पशु राहत कैंप और 17 पशु चिकित्सा कैंप संचालित हैं। करीब 300 पशुओं को चिकित्सा सुविधा दी जा चुकी है। वहीं अब तक 810 क्विंटल पशु चारा वितरित किया गया है।बाढ़ग्रस्त तीनों प्रखंडों में 227 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनके जरिए लोगों के सुरक्षित आवागमन के साथ राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

प्रभारी मंत्री और जिलाधिकारी ने अधिकारियों को जलस्तर व तटबंधों की लगातार निगरानी, नावों की उपलब्धता, सामुदायिक रसोई के नियमित संचालन और मेडिकल कैंप में दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर भोजन, राहत सामग्री, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित आवागमन पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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