पटना, 02 मई (अविनाश कुमार) बिहार की राजनीति में उस वक्त अप्रत्याशित मोड़ आ गया जब कांग्रेस विधायक सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने अपनी ही पार्टी की लाइन से हटकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कामकाज की खुलकर सराहना कर दी। उनके इस बयान से न केवल विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है, बल्कि सत्तापक्ष को भी एक बड़ा नैरेटिव मिल गया है।

जहां एक ओर विपक्ष लगातार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं कुशवाहा ने सरकार के निर्णयों और कार्यशैली को “सराहनीय” करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने विजन के अनुरूप प्रभावी ढंग से काम कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि सरकार को अपने तरीके से फैसले लेने और नियुक्तियां करने का पूरा अधिकार है, और अब तक का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है।सबसे चौंकाने वाला बयान उन्होंने अपराध और एनकाउंटर को लेकर दिया। हाल के दिनों में पुलिस की सख्त कार्रवाई का समर्थन करते हुए कुशवाहा ने कहा कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती और जहां भी अपराध होगा, वहां सख्ती जरूरी है।

उन्होंने एनकाउंटर नीति को राज्य के हित में बताते हुए इसे “जरूरी और प्रभावी कदम” बताया, जिससे समाज में कानून का डर बना रहता है।वहीं, जदयू नेता नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की संभावित राजनीतिक यात्रा पर भी उन्होंने टिप्पणी की। कुशवाहा ने कहा कि जैसे नीतीश कुमार अपनी यात्राओं की शुरुआत वाल्मीकि नगर से करते रहे हैं, उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निशांत कुमार भी वहीं से अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर सकते हैं। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल पर प्रतिक्रिया देते हुए कुशवाहा ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे प्रचार में शामिल नहीं थे, इसलिए जमीनी स्थिति की सटीक जानकारी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 4 तारीख को आने वाले नतीजे ही असली तस्वीर सामने लाएंगे।कुल मिलाकर, कांग्रेस विधायक का यह बयान बिहार की सियासत में नए समीकरणों के संकेत दे रहा है।















