पटना, 06 अप्रैल (अविनाश कुमार) मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश पर बिहार सरकार ने एजुकेशन सिटी की स्थापना के लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर दी है। राज्य मंत्रिमंडल ने 16 दिसंबर 2025 को प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और अब सरकार इसे तेजी से क्रियान्वित करने की राह पर है। एजुकेशन सिटी का लक्ष्य ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित शेयर्ड कैंपस मॉडल तैयार करना है, जिसमें विश्वविद्यालय और कॉलेज अपनी पहचान बनाए रखते हुए सुविधाएं साझा करेंगे।शेयर कैंपस मॉडल को इंटरनेशनल स्तर के अनुभव और साइंटिफिक स्टडीज के आधार पर डिजाइन किया गया है।

जापान और सिंगापुर के कंसल्टेंट्स भी डीपीआर पर सलाह दे रहे हैं। अगले दो महीने में इसका विस्तृत इंटरनेशनल मॉडल सामने आने की संभावना है। एजुकेशन सिटी लगभग ढाई सौ एकड़ में फैलेगा और इसमें स्मार्ट क्लासेस, डिजिटल लाइब्रेरी, अत्याधुनिक लैब, रिसर्च सेंटर, सेमिनार हॉल, गेस्ट हाउस, हॉस्टल, स्पोर्ट्स स्टेडियम, इंडोर स्टेडियम और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं होंगी। इसके साथ ही फैकल्टी और स्टाफ के लिए आवासीय परिसर भी बनाए जाएंगे। शेयर कैंपस मॉडल से उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच संसाधनों का साझा उपयोग संभव होगा। इससे समय की बचत होगी, छात्रों और शिक्षकों के लिए सुविधाएं आसान होंगी और एक मजबूत एजुकेशन-रिसर्च इकोसिस्टम का निर्माण होगा।

परिसर में इंडस्ट्री कनेक्शन, अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर, कोर्स और रिसर्च के अवसर एक ही जगह उपलब्ध होंगे। सरकार का दावा है कि यह एजुकेशन हब बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा का मजबूत केंद्र बनाएगा। 547 करोड़ रुपये की प्राथमिक राशि तय की गई है, जो परियोजना के विस्तार और गुणवत्ता को ध्यान में रखकर बढ़ भी सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना से न सिर्फ क्वालिटी एजुकेशन बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे और राज्य में उच्च शिक्षा का भविष्य मजबूत होगा।
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