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बिहार में जमीन के कागज होंगे चकाचक: 5 जिलों में सर्वे अंतिम चरण में, दिसंबर 2026 तक पूरे राज्य में विशेष सर्वे का लक्ष्य

पटना, 12 अगस्त (पटना डेस्क) बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने की कवायद तेज हो गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने पिछले दिनों शिवहर, अरवल, जहानाबाद, लखीसराय और शेखपुरा जिलों में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्य की उच्चस्तरीय समीक्षा की। समीक्षा बैठक में अधिकारियों से प्रगति की जानकारी लेते हुए मंत्री ने सभी स्तरों पर पारदर्शिता और तेजी के साथ काम पूरा करने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि इन पांच जिलों में विशेष सर्वेक्षण का काम अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इन जिलों के बाद अगले चरण में शामिल किए जाने वाले जिलों का निर्धारण किया जाएगा और सर्वेक्षण की गति बढ़ाई जाएगी।

विभाग ने पूरे विशेष भूमि सर्वेक्षण को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।दरअसल, बिहार में दशकों पुराने कैडस्ट्रल और रिविजनल सर्वे के अभिलेखों को आधुनिक तकनीक से अपडेट किया जा रहा है। जीआईएस और एरियल मैपिंग के साथ जमीन का मौके पर भौतिक सत्यापन भी होगा। सरकार का उद्देश्य फर्जीवाड़े, अवैध कब्जे और जमीन की दोहरी बिक्री जैसी समस्याओं पर प्रभावी रोक लगाना है। सरकारी, गैर-मजरूआ और भूदान भूमि का भी स्पष्ट रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। सर्वे पूरा होने के बाद जमीन का नक्शा, खतियान और अधिकार अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना है। इससे दाखिल-खारिज और पारिवारिक बंटवारे की प्रक्रिया आसान होने के साथ वास्तविक रैयत की पहचान भी स्पष्ट होगी।

मुआवजा और पीएम-किसान जैसी योजनाओं का लाभ वास्तविक भू-स्वामी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।रैयतों को प्रपत्र-2 में खाता, खेसरा, रकबा और चौहद्दी का स्व-घोषणा पत्र देना होगा। पैतृक जमीन के लिए प्रपत्र-3(1) में वंशावली, पुराना खतियान या केवाला, अद्यतन लगान रसीद और आधार कार्ड जरूरी होंगे। कोर्ट या अंचल स्तर से हुए बंटवारे अथवा दाखिल-खारिज का आदेश भी संलग्न करना होगा।विशेष सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है। अमीन, कानूनगो या शिविर प्रभारी को किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना है। सर्वे टीम मौके पर पहुंचकर प्लॉट की मेड़ और चारों कोनों की नापी करेगी। जीपीएस और ईटीएस मशीनों से जियो-रेफरेंसिंग कर डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा। भौतिक सत्यापन के दौरान रैयत या अधिकृत प्रतिनिधि की मौजूदगी जरूरी होगी। विभाग ने लोगों से दस्तावेज पहले से जमा रखने और पड़ोसियों की सहमति से सही सीमा की पैमाइश कराने की अपील की है।

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