पटना, 23 अगस्त (पटना डेस्क) बच्चों के अधिकारों और उनके संरक्षण को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के तत्वावधान में रविवार को विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी देकर उन्हें जागरूक और सशक्त बनाना रहा। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को बताया गया कि किसी भी तरह के शोषण, हिंसा अथवा अधिकारों के हनन की स्थिति में चुप रहना उचित नहीं है। अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम-सह-प्रभारी सचिव मो. अफजल आलम के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों के हित से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

वक्ताओं ने बच्चों को शिक्षा के अधिकार के बारे में विस्तार से समझाते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। साथ ही बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।कार्यक्रम में बच्चों को हिंसा और दुर्व्यवहार से बचाव के उपाय बताए गए। उन्हें समझाया गया कि यदि किसी बच्चे के साथ शोषण, मारपीट, उत्पीड़न या किसी अन्य प्रकार की ज्यादती होती है तो उसे सहकर चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे अपने अभिभावक, शिक्षक, संबंधित संस्था अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकार से तत्काल मदद ले सकते हैं। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, लेकिन इनका प्रभावी लाभ तभी मिल सकता है, जब बच्चे और उनके अभिभावक इन अधिकारों और कानूनी उपायों के प्रति जागरूक हों।कार्यक्रम के दौरान निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी गई। जरूरतमंद लोगों को बताया गया कि आर्थिक या अन्य किसी कारण से न्याय पाने में परेशानी होने पर वे विधिक सेवा प्राधिकार की सहायता ले सकते हैं। इसके लिए टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क किया जा सकता है। कार्यक्रम में पैनल अधिवक्ता विमलेश कुमार, पाराविधिक स्वयंसेवक रणवीर सिंह और मो. मोअज्जम उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उन्हें कानूनी रूप से जागरूक बनाने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।













