सिलीगुड़ी, 21 अप्रैल (सेंट्रल डेस्क) अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए गोरखा मुद्दे पर अहम घोषणा की है। सुकना में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने वादा किया कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के छह महीने के भीतर गोरखा समस्या का स्थायी समाधान कर दिया जाएगा। यह सभा दार्जिलिंग, कर्सियांग और कालिम्पोंग सीटों के उम्मीदवारों के समर्थन में आयोजित की गई थी।

शाह ने कहा कि समाधान गोरखा समुदाय की इच्छाओं के अनुरूप होगा और इसके बाद “गोरखा भाइयों-बहनों के चेहरे पर खुशी लौटेगी।” उन्होंने दावा किया कि इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन तय है और पहाड़ के लोग ममता बनर्जी की सरकार को “टाटा-बाय-बाय” कहने के लिए तैयार हैं। गृह मंत्री ने चुनाव को “तृणमूल सरकार से मुक्ति का चुनाव” करार देते हुए तृणमूल कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के तहत बड़े पैमाने पर घोटाले हुए हैं।

शाह ने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद इन कथित घोटालों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में आंदोलनों के दौरान गोरखा समुदाय पर दर्ज सभी मामलों को भाजपा सरकार बनने पर वापस ले लिया जाएगा। इसके साथ ही शाह ने राज्य सरकार की बजट प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, गोरखा और आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए जहां लगभग 2000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाते हैं, वहीं मुस्लिम और मदरसा मद में 5800 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।

सभा में शाह ने बार-बार “कमल खिलाने” की अपील करते हुए कहा कि भाजपा की सरकार आने पर पहाड़ के विकास को नई गति मिलेगी। उनके इस बयान से चुनावी माहौल और गर्म हो गया है, वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोरखा मुद्दा इस बार बंगाल चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

















