
बक्सर, 15 अप्रैल (विक्रांत) बिहार की सियासत उस वक्त गरमा गई जब जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण और उनकी योग्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। PK ने कहा कि शपथ समारोह में देशभर से भाजपा के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी इस बात का संकेत है कि यह नेतृत्व स्वाभाविक जनादेश से नहीं, बल्कि “पिछले दरवाजे” से स्थापित किया गया है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में चुनाव नीतीश कुमार के नाम पर लड़ा गया था, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर किसी और को बैठाना जनता के साथ “धोखा” है। PK ने इसे लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ बताया।

सबसे तीखा हमला करते हुए PK ने सम्राट चौधरी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अब जब आप राज्य के मुखिया बन गए हैं, तो कम से कम यह स्पष्ट करें कि आपने 10वीं पास कब और कहां से की? अगर नहीं की, तो भी कोई बात नहीं, मुद्दा पारदर्शिता का है।”

PK ने आगे बिहार की ऐतिहासिक ज्ञान परंपरा चाणक्य, आर्यभट्ट और नालंदा-विक्रमशिला का हवाला देते हुए Bharatiya Janata Party पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “चाल, चरित्र और चेहरा” की बात करने वाली पार्टी आज ऐसे नेतृत्व को आगे बढ़ा रही है, जिसकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि तक स्पष्ट नहीं है।PK के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।















