नालंदा, 30 जून (अविनाश पांडेय) नालंदा के मोरा तालाब में सोमवार शाम आयोजित जनसभा में पूर्व सांसद आनंद मोहन ने राज्य की मौजूदा राजनीति पर खुलकर अपनी बात रखते हुए सरकार पर तीखे सवाल दागे। मुख्यमंत्री पद में हुए बदलाव, सत्ता संचालन, विभागों के बंटवारे और हाल के एनकाउंटर मामलों को लेकर उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। साथ ही कहा कि वह किसी पुत्र या पत्नी मोह में नहीं, बल्कि लोकतंत्र और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए मैदान में उतरे हैं। सभा को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उनके नेता नहीं, बल्कि बड़े भाई हैं। उन्होंने कहा, “हम दोनों का राजनीतिक सफर जेपी आंदोलन से शुरू हुआ है। “मैं उनका चमचा नहीं, भाई हूं और भाई को भाई से ज्यादा मोहब्बत होती है”।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब एनडीए ने “2025 से 30, फिर से नीतीश” का नारा दिया था और सरकार सुचारू रूप से चल रही थी, तो आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी कि रातों-रात नेतृत्व बदल दिया गया। उन्होंने इसे जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताया।पूर्व सांसद ने बिना किसी का नाम लिए सत्ता के शीर्ष पर बैठे कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए वर्षों तक संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलता, जबकि पर्दे के पीछे रहने वाले कुछ लोगों ने सत्ता का दुरुपयोग कर बिहार, दिल्ली, मुंबई से लेकर सिंगापुर और दुबई तक हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक साम्राज्य खड़ा कर लिया है। आनंद मोहन ने कहा कि यदि उन्हें परिवार का मोह होता तो वह सक्रिय राजनीति से दूर रहते, क्योंकि उनके परिवार में पहले से सांसद और विधायक हैं।

उन्होंने सरकार में विभागों के बंटवारे पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ समाज के नेताओं को हमेशा सीमित महत्व वाले विभाग ही क्यों दिए जाते हैं। भरत तिवारी एनकाउंटर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह न बुलडोजर संस्कृति के समर्थक हैं और न ही एनकाउंटर संस्कृति के। उनका कहना था कि यदि कोई आरोपी आत्मसमर्पण करता है या न्यायिक हिरासत में है, तो उसकी सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। पुलिस का दायित्व आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करना है, जबकि दोषी या निर्दोष होने का फैसला केवल अदालत को करना चाहिए।














