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दिहाड़ी से स्थायी का ऐतिहासिक फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने इसरो के मजदूरों को दिलाया हक, प्रशासन की लापरवाही पर फटकार

नई दिल्ली, 30 अप्रैल (अशोक “अश्क”) सर्वोच्च न्यायालय ने इसरो से जुड़े लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) में वर्षों से काम कर रहे दिहाड़ी मजदूरों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सेवाओं को नियमित करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि संबंधित अधिकारियों ने पूर्व के न्यायिक आदेशों का पालन नहीं किया और मजदूरों को स्थायी दर्जा देने में गंभीर लापरवाही बरती।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। यह याचिका उन दिहाड़ी मजदूरों द्वारा दाखिल की गई थी, जो 1991 से 1997 के बीच महेंद्रगिरि स्थित एलपीएससी में सामग्री लोडिंग, अनलोडिंग और स्थानांतरण जैसे कार्यों में लगे थे।

मजदूरों ने ‘गैंग लेबरर्स (स्पोराडिक कार्य योजना), 2012’ को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें स्थायी दर्जा देने के बजाय अस्थायी रूप से काम जारी रखने का प्रावधान था। इससे पहले मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि 2012 की यह योजना केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), हाईकोर्ट और स्वयं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के विपरीत है और इनका पूर्ण पालन नहीं किया गया।अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं को 9 सितंबर 2010 से प्रभावी रूप से स्थायी दर्जा दिया जाए।

साथ ही संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया लागू करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य एक आदर्श नियोक्ता के रूप में अपने कर्मचारियों के साथ मनमाना व्यवहार नहीं कर सकता। यह फैसला समान परिस्थितियों में कार्यरत अन्य कर्मचारियों पर भी लागू होगा, जिससे हजारों श्रमिकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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