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दलित-आदिवासी उत्पीड़न मामलों पर सख्त हुआ प्रशासन, एसडीओ ने दिया त्वरित कार्रवाई का अल्टीमेटम

समस्तीपुर, 30 जून (मोहम्मद जमशेद) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के त्वरित निष्पादन को लेकर मंगलवार को समस्तीपुर सदर अनुमंडल कार्यालय में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। अनुमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार की अध्यक्षता में हुई द्वितीय त्रैमासिक अनुश्रवण समिति की बैठक में लंबित मामलों पर गहन समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि पीड़ितों को समय पर न्याय, राहत और पुनर्वास की सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध कराई जाएं।

अनुमंडल सभा कक्ष में आयोजित बैठक में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, राजस्व पदाधिकारी, थाना अध्यक्ष, अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि तथा विकास मित्र मौजूद रहे। बैठक के दौरान अनुमंडल क्षेत्र के सभी प्रखंडों एवं थानों में दर्ज एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के मामलों की बिंदुवार समीक्षा की गई। प्राप्त आवेदनों की वर्तमान स्थिति, जांच की प्रगति और पीड़ितों को उपलब्ध कराई गई सहायता पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करते हुए दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

बैठक को संबोधित करते हुए एसडीओ दिलीप कुमार ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय के खिलाफ अत्याचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के लिए समन्वित प्रयास सुनिश्चित करें।बैठक में मौजूद जनप्रतिनिधियों एवं समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न सुझाव रखे, जिन पर प्रशासन ने गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया। अधिकारियों ने सामाजिक समरसता बनाए रखने, कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कमजोर वर्गों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी कार्रवाई का संकल्प दोहराया।

बैठक के अंत में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज प्रत्येक मामले की नियमित निगरानी की जाएगी और पीड़ितों को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप राहत एवं पुनर्वास का लाभ समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। इससे न्याय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता मजबूत हुई है।

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