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डोनल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, संघर्ष से कमाई का खुला इशारा

नई दिल्ली, 07 अप्रैल (अशोक “अश्क”) वैश्विक राजनीति में एक बार फिर सनसनी फैल गई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि चल रहे अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के परिणामस्वरूप ईरान के तेल संसाधनों पर संयुक्त राज्य अमेरिका नियंत्रण स्थापित कर सकता है। ट्रंप ने इस संभावित कदम को सैन्य कार्रवाई के बदले आर्थिक लाभ के रूप में पेश किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नई बहस छिड़ गई है।

एक बातचीत के दौरान जब उनसे ईरान के तेल को सुरक्षित करने के बारे में सवाल पूछा गया, तो ट्रंप ने बेबाकी से कहा, “अगर मेरे पास चॉइस होती… हां, क्योंकि मैं सबसे पहले एक बिजनेसमैन हूं।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि वे भू-राजनीतिक फैसलों को आर्थिक नजरिए से देखने में विश्वास रखते हैं। ट्रंप ने अपने तर्क को मजबूत करने के लिए पूर्व सैन्य अभियानों का हवाला देते हुए कहा, “युद्ध सालों तक चलते हैं, लेकिन हम वहां सिर्फ 34 दिनों के लिए थे और हमने एक बहुत ताकतवर देश को पूरी तरह तबाह कर दिया।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि निर्णय उनके हाथ में होता, तो वे तेल संसाधनों को अपने कब्जे में रखना पसंद करते, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अमेरिकी जनता इस सोच को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाएगी। अपने बयान को और धार देते हुए ट्रंप ने कहा कि वे तेल लेना, उसे सुरक्षित रखना और उससे अधिकतम आर्थिक लाभ कमाना चाहेंगे। उन्होंने वेनेज़ुएला का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां अमेरिका की भागीदारी से पहले ही ऊर्जा क्षेत्र में बड़े फायदे हासिल हो चुके हैं। उनके अनुसार, “हम वेनेज़ुएला के साझीदार हैं और हमने वहां से 10 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल लिया है।”ट्रंप ने आगे कहा, “जीतने वाले को ही इनाम मिलता है… और इस देश में शायद 100 सालों से ऐसा नहीं हुआ है।” उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय कानून, नैतिकता और संसाधनों पर अधिकार को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि तेल संसाधनों को लेकर इस तरह की खुली सोच वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकती है। ट्रंप का तर्क है कि इससे सैन्य अभियानों की लागत की भरपाई संभव है, लेकिन आलोचक इसे संसाधनों के शोषण की खुली वकालत मान रहे हैं।

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