पटना, 25 सितम्बर (अविनाश कुमार) जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके स्वजन के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि तस्वीर मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई, जिससे नाबालिग की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ।नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुख्यमंत्री पर सवाल उठाते हुए POCSO एक्ट की धारा 23 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कानून के तहत बच्चे की पहचान उजागर करने वाली जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।

तेजस्वी ने बिहार पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की मांग भी की। राजद सांसद मीसा भारती ने भी तस्वीर को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि तस्वीर में दिखाई दे रही बच्ची क्या जमुई मामले की पीड़िता है। मीसा भारती ने इस मामले में बिहार पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जमुई की नाबालिग पीड़िता अपने स्वजन के साथ मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थी। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार को त्वरित न्याय का भरोसा दिलाते हुए आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी।

इसी मुलाकात की तस्वीर सामने आने के बाद विपक्ष ने पहचान उजागर होने का मुद्दा उठाया है। गौरतलब है कि 19 सितंबर को जमुई में कोचिंग से लौट रहे एक नाबालिग छात्र और छात्रा को कुछ युवकों ने रास्ते में रोककर कथित तौर पर बदसलूकी की थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की थी।













