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गन्ने पर मंडराया अमेरिकन सुंडी का खतरा: फॉल आर्मी वर्म बना किसानों का नया काल, फसल पर बड़ा संकट

बेतिया, 31 मई (विनय कुमार गुप्ता) मक्का की फसल का सबसे खतरनाक दुश्मन माना जाने वाला फॉल आर्मी वर्म (अमेरिकन सुंडी) अब गन्ने की खेती के लिए भी गंभीर खतरा बनकर सामने आया है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह विनाशकारी कीट 80 से अधिक फसलों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है और इसकी तेजी से फैलती प्रकृति किसानों की चिंता को लगातार बढ़ा रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इस कीट पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो गन्ना उत्पादन पर भारी आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।

नरकटियागंज चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष रविंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप विशेष रूप से गन्ने की शुरुआती अवस्था में, यानी दो से पांच महीने की फसल में अधिक देखने को मिल रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मिल प्रबंधन ने विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित कर खेतों में निगरानी और जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस टीम में कार्यपालक उपाध्यक्ष राजीव त्यागी, गन्ना महाप्रबंधक कुलदीप सिंह ढाका, गन्ना उप प्रबंधक प्रेम सिंह सहित विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं। यह टीम किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर कीट की पहचान और उसके नियंत्रण के उपायों को प्रभावी रूप से लागू कराने में जुटी है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार भारत में फॉल आर्मी वर्म का पहला बड़ा प्रकोप वर्ष 2018 में दर्ज किया गया था। शुरुआत में इसे केवल मक्का की फसल तक सीमित माना गया था, लेकिन धीरे-धीरे इस कीट ने दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक अपने पैर पसार लिए। अब यह गन्ने सहित कई अन्य फसलों को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। किसानों को प्रति एकड़ पांच से आठ फेरोमोन ट्रैप लगाने की सलाह दी जा रही है, जिससे नर पतंगों की संख्या नियंत्रित हो सके और शुरुआती स्तर पर प्रकोप की पहचान हो पाए। इसके अलावा नीम आधारित उत्पाद, ब्यूवेरिया बेसियाना, मेटाराइजियम एनीसोप्लाई और बैसिलस थुरिन्जिएन्सिस जैसे जैविक उपाय भी प्रभावी माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अधिक प्रकोप की स्थिति में कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर क्लोरान्ट्रानिलीप्रोल, इमामेक्टिन बेंजोएट और स्पिनेटोरम जैसे कीटनाशकों का उपयोग किया जा सकता है। फॉल आर्मी वर्म के हमले से पत्तियों में अनियमित छेद, पारदर्शी धब्बे और पत्तियों का कंकाल जैसा स्वरूप बन जाता है। नई पत्तियां कटी-फटी निकलती हैं तथा पौधों के बीच भूरे रंग की बीट जमा हो जाती है, जो फसल को गंभीर रूप से कमजोर कर देती है।

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