आज साहित्यिक आंगन गीत गुंजन में उत्तर प्रदेश, प्रतापगढ़ से सुप्रसिद्ध कवि राजकिशोर मिश्र ‘राज’ प्रतापगढ़ी जी की एक द्विगुणित चौपाई गीतिका

एकदन्त रिपुनाशक गणपति , प्रथमेश्वर शिवनंदन वंदनl
गजाननं गजवदन गणेशं , गौरीसुत अभिनन्दन वंदन ll
मूषक वाहन बुद्धिविधाता , कपिल अमित गजनायक सुरपति।
lमंगल मूरति अनुपम सूरति, शशिवर्णम शुचि चन्दन वंदन ll
शूर्पाकरणम शुभम प्रदातम , सिद्धिविनायक हे विघ्नेश्वर l
वक्रतुंड मोदक प्रिय गणपति , घृणये असुर निकंदन वंदन ll
अमित बुद्धिप्रिय ज्यों गणनायक , कञ्चनवर्ण बुद्धि गणक्रीडा l
वरदायक शुभकारक गणपति , प्रथम पूज्य कवि छंदन वंदन ll
हे निगमागममूलक गणपति , वेद पुराण सु लेखक गणपति i
गजाननं गजवदन गणेशं , शोकनिकन्दन मंदन वंदन ll
~ राजकिशोर मिश्र ‘राज’ प्रतापगढ़ी


















