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करोड़ों की स्मार्ट सिटी योजना फेल: बंद पड़े ट्रैफिक सिग्नल, फिर भी कट रहे चालान

नालंदा, 01 जून (अविनाश पांडेय) स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर बिहारशरीफ में स्थापित की गई हाईटेक यातायात व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। शहर के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल महीनों से बंद पड़े हैं, लेकिन दूसरी ओर नियम उल्लंघन के नाम पर वाहन चालकों के चालान लगातार काटे जा रहे हैं। इस दोहरी व्यवस्था को लेकर आम लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।सबसे चिंताजनक स्थिति अस्पताल चौक की है, जहां पिछले एक महीने से केवल एक ट्रैफिक लाइट के भरोसे पूरे चौराहे की यातायात व्यवस्था संचालित की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिग्नल बंद रहने से रोजाना जाम लग रहा है और राहगीरों के साथ वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए स्मार्ट सिटी योजना के तहत इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आई-ट्रिपल-सी) की स्थापना की गई थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआती लागत 102.94 करोड़ रुपये थी, जो बाद में बढ़कर करीब 125 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसके तहत बिहार थाना परिसर में कंट्रोल सेंटर बनाया गया और शहर के विभिन्न हिस्सों में 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे तथा ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे। वर्ष 2021 में अस्पताल चौक से शुरू हुई यह व्यवस्था शुरुआती दौर में प्रभावी रही, लेकिन रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे अधिकांश सिग्नल खराब हो गए।

वर्तमान में देवीसराय चौक, करगिल चौक, 17 नंबर मोड़, भरावपर चौराहा, सोहसराय मोड़, अंबेर मोड़, खंदक मोड़, भैंसासुर मोड़ और मछली मार्केट सहित कई प्रमुख स्थानों पर लगे ट्रैफिक सिग्नल निष्क्रिय पड़े हैं। सिर्फ ट्रैफिक सिग्नल ही नहीं, निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। लोगों का आरोप है कि कई कैमरे खराब पड़े हैं, जबकि चालू कैमरों की गुणवत्ता इतनी कमजोर है कि स्पष्ट पहचान करना मुश्किल हो जाता है। शहरवासियों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद न यातायात व्यवस्था सुधर सकी और न निगरानी व्यवस्था प्रभावी बन सकी, तो आखिर इस परियोजना का लाभ किसे मिला? अब लोगों की निगाहें प्रशासन और स्मार्ट सिटी प्रबंधन पर टिकी हैं कि आखिर कब इस बदहाल व्यवस्था को दुरुस्त कर शहर को जाम से राहत दिलाई जाएगी।

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