पटना, 12 अगस्त (पटना डेस्क) बिहार में मौसम का कहर जानलेवा साबित हो रहा है। नवादा, जमुई, बांका और लखीसराय जिलों में इस सप्ताह आए तेज आंधी-तूफान और वज्रपात की घटनाओं में कुल 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश महिलाएं थीं, जो खेतों में धान की रोपनी का कार्य कर रही थीं। इस दर्दनाक हादसे के बाद कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गई। सबसे दर्दनाक घटना बांका जिले के चांदन प्रखंड के बोड़ा-सुईया गांव में हुई, जहां वज्रपात की चपेट में आने से कुशामी देवी, रेणु देवी और रिंकू देवी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, सौरभ कुमार (10) और रानी कुमारी (12) गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों का इलाज जारी है। इसके अलावा लखीसराय, नवादा और जमुई जिलों में भी वज्रपात ने कई परिवारों को गहरा जख्म दिया।

घटना के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए सभी मृतकों के परिजनों को आपदा राहत मद से चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिया है। साथ ही घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अचानक बदले मौसम और तेज गर्जन के बीच खेतों में काम कर रहे लोग सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंच सके, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ।

प्रशासन ने लोगों से मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लेने और आंधी, बारिश तथा वज्रपात के दौरान खुले खेतों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि मानसून के दौरान वज्रपात की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में थोड़ी-सी सतर्कता कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है। सरकार ने लोगों से मौसम संबंधी अलर्ट का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है।













