मुजफ्फरपुर, 07 अक्टूबर (संतोष गुप्ता) डीएपी उर्वरक की कथित कालाबाजारी और निर्धारित दर से अधिक राशि वसूलने के मामले में कृषि विभाग ने सिकंदरपुर चौक स्थित थोक उर्वरक प्रतिष्ठान मेसर्स अशोक टायर एजेंसी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिला कृषि पदाधिकारी ने एजेंसी का उर्वरक निबंधन लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। साथ ही सभी उर्वरक निर्माता कंपनियों को एजेंसी को किसी भी प्रकार के उर्वरक की आपूर्ति नहीं करने का निर्देश दिया गया है।कार्रवाई कुढ़नी के खुदरा उर्वरक विक्रेता मेसर्स श्री ट्रेडर्स के प्रोपराइटर की शिकायत के बाद हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अशोक टायर एजेंसी ने दो लाख रुपये लेने के बावजूद मात्र 100 बोरी डीएपी उपलब्ध कराई। इस हिसाब से प्रति बोरी दो हजार रुपये की राशि ली गई, जो निर्धारित दर से अधिक बताई गई।

शिकायत मिलने के बाद कृषि विभाग ने थोक विक्रेता से स्पष्टीकरण मांगा था।विभागीय कार्रवाई के दौरान एजेंसी की ओर से दो लाख रुपये लेने की बात स्वीकार की गई, लेकिन इस राशि के समर्थन में कोई वैध कागजात या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया जा सका। एजेंसी ने सफाई में दावा किया कि उक्त राशि अमोनिया सल्फेट के लिए ली गई थी। हालांकि, विभाग इस दावे से संतुष्ट नहीं हुआ। जिला कृषि पदाधिकारी भारत भूषण ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला उर्वरक नियंत्रण आदेश और आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़ा पाया गया है। मामले में पहले एजेंसी का लाइसेंस निलंबित कर अंतिम स्पष्टीकरण मांगा गया था। जवाब की समीक्षा के बाद अब लाइसेंस रद्द करने का निर्णय लिया गया है।

कार्रवाई की जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को भी दे दी गई है।बताया जाता है कि अशोक टायर एजेंसी का लाइसेंस पहले भी रद्द किया जा चुका था। लगातार शिकायतों के बाद लाइसेंस बहाल किए जाने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। अब दोबारा लाइसेंस रद्द होने के बाद उर्वरक की बिक्री और आपूर्ति व्यवस्था पर विभाग की सख्ती चर्चा में है।

















