पटना, 06 अक्टूबर (अविनाश कुमार) बिहार के पारंपरिक विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों की खाली सीटों को भरने के लिए स्पॉट राउंड दाखिले की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होगी। इच्छुक विद्यार्थी समर्थ पोर्टल के माध्यम से निर्धारित अवधि में आवेदन कर सकेंगे। पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय समेत अन्य विश्वविद्यालयों ने स्पॉट राउंड को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। रिक्त सीटों की कॉलेजवार और विषयवार जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। स्पॉट राउंड में विद्यार्थियों को अपनी पसंद के अधिकतम 10 कॉलेज चुनने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही पांच नए विषयों के विकल्प भी दिए जा सकेंगे। विद्यार्थियों को आवेदन करने से पहले संबंधित विश्वविद्यालय में उपलब्ध खाली सीटों की जानकारी जांचने की सलाह दी गई है।

इस प्रक्रिया में वे विद्यार्थी भी शामिल हो सकेंगे, जिन्होंने पहले आवेदन किया था, लेकिन किसी कॉलेज या पाठ्यक्रम में दाखिला नहीं ले सके। पहले से पंजीकृत विद्यार्थियों को अपनी लॉगिन आईडी से आवेदन करना होगा। ऐसे विद्यार्थियों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। विश्वविद्यालयों ने स्पष्ट किया है कि स्पॉट राउंड में किसी भी कोटे के आधार पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र विद्यार्थियों की सूची जारी की जाएगी। विश्वविद्यालयों के अनुसार पात्रता सूची अक्टूबर में जारी होने की संभावना है। विद्यार्थियों को आवेदन के दौरान कॉलेज और विषय का चयन सावधानी से करना होगा।पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में इंटर्नशिप व्यवस्था बदलीपाटलिपुत्र विश्वविद्यालय ने पांचवें सेमेस्टर के विद्यार्थियों की इंटर्नशिप को लेकर भी बड़ा बदलाव किया है।

शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पुराने इंटर्नशिप समझौतों को रद्द कर दिया गया है। अब कॉलेजों को संस्थानों के साथ नए सिरे से समझौता करना होगा। विश्वविद्यालय ने निर्देश दिया है कि पहले उन संस्थानों में इंटर्नशिप कराई जाए, जो उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर सूचीबद्ध हैं। सूचीबद्ध संस्था के साथ सीधा समझौता नहीं होने पर कॉलेज के प्राचार्य और नए इंटर्नशिप समन्वयक को समझौता करना होगा। समझौते के बाद कॉलेज को विश्वविद्यालय को ईमेल से जानकारी देनी होगी। इंटर्नशिप छुट्टियों के दौरान करानी होगी, ताकि नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो। इससे कॉलेजों की जिम्मेदारी बढ़ गई है और उन्हें विद्यार्थियों तथा संबंधित संस्थानों के बीच समय रहते समन्वय करना होगा।













